बॉबी भी सच बोलने से पहले खत्म
ऋषि बाबू खान से कहता है कि अब पीछे हटने का रास्ता नहीं। उसे बॉबी को पकड़वाना होगा और पुलिस के सामने पूरा सच कहना होगा। ऋषि भरोसा दिलाता है कि वह उसकी मदद करेगा और उसकी भूमिका छोटी दिखाकर सजा कम करवाने की कोशिश करेगा।
इसी दौरान इंस्पेक्टर रवि ऋषि को उसकी बहन के घर से गिरफ्तार कर लेता है। थाने में उस पर सख्त पूछताछ होती है। एसीपी जया भी मामले में मौजूद है। तभी ऋषि के फोन पर बाबू खान का कॉल आता है। फोन रवि उठाता है। बाबू बताता है कि उसने बॉबी को पकड़ लिया है। पुलिस उसे तुरंत थाने लाती है।
अब लगता है कि पूरा राज खुल जाएगा। लेकिन पूछताछ के बीच बॉबी अचानक जया की बंदूक छीन लेता है। संघर्ष होता है और गोली चल जाती है। बॉबी वहीं मारा जाता है। एक और ऐसा व्यक्ति खत्म हो गया जो रिया के अपहरण की सच्चाई अदालत तक पहुँचा सकता था।
जया बाद में ऋषि से निजी बातचीत करती है। वह बताती है कि एक दुर्घटना में उसने अपने पति और गर्भ में पल रहे बच्चे को खो दिया था। ऋषि उसकी पीड़ा सुनकर सहानुभूति जताता है। जया बाहर से संवेदनशील अधिकारी लगती है, लेकिन ऋषि के मन में अब हर संयोग संदिग्ध हो चुका है। फिलहाल उसका मुख्य शक कार्तिक पर है।
बाबू खान की आखिरी मदद
उधर वही दो गुंडे बाबू खान तक पहुँचते हैं। वे उसे मारते-पीटते हैं और ऋषि के बारे में पूछते हैं। ऋषि वहाँ पहुँचकर उनसे भिड़ जाता है। संघर्ष में बाबू खान मौका पाकर दोनों को गोली मार देता है, मगर वह खुद भी गंभीर रूप से घायल हो चुका होता है। कुछ ही देर में उसकी मौत हो जाती है।
ऋषि मरे हुए गुंडों का फोन चेक करता है। उसमें उसकी अपनी तस्वीर दिखाई देती है, जिसे किसी ने उन्हें भेजा था। वह तुरंत पहचानता है कि यह फोटो कुछ समय पहले जया ने ली थी। अब शक पहली बार सीधे उसी पर जाता है। क्या जया पुलिस की मदद नहीं बल्कि पूरी साजिश को नियंत्रित कर रही थी?
ऋषि जया के घर जाता है। नौकर बताता है कि वह फार्महाउस पर है। वह रास्ते में इंस्पेक्टर रवि को फोन करता है। इस बार वह कॉल को ऐसी स्थिति में छोड़ देता है कि दूसरी तरफ का आदमी आगे की बातचीत सुन सके। फिर अकेले फार्महाउस पहुँचता है।
रिया वास्तव में जिंदा है
फार्महाउस में ऋषि को वही आदमी दिखाई देता है जिसने अखबार के विज्ञापन के बाद दावा किया था कि रिया उसकी बेटी है। वह ऋषि को देखकर भाग जाता है। ऋषि आगे बढ़ता है और सामने जो देखता है उससे कुछ पल के लिए उसकी साँस रुक जाती है—रिया जिंदा है। वह जया के पास रह रही है और जया उसका ख्याल अपनी बेटी की तरह रख रही है।
अब जया छिपने की कोशिश नहीं करती। वह पूरी कहानी खोलती है। कार्तिक ने ही रिया को हटाने की योजना बनाई थी। बॉबी ने नाइजीरियन अपराधियों को लगाया और कार चोरी के बहाने बच्ची को किडनैप करवाया। मूल योजना रिया को मार देने की थी। उस समय जया पुलिस में इस केस को संभाल रही थी। जांच के दौरान रिया उसे मिल गई।
जया तब अपने सबसे बड़े निजी दुख से गुजर रही थी। हादसे में उसका पति और होने वाला बच्चा दोनों मर चुके थे। उसने अपने अजन्मे बच्चे के लिए रिया नाम सोचा था। सामने एक डरी हुई बच्ची देखकर उसके भीतर मातृत्व और शोक का अजीब मिश्रण पैदा हुआ। उसने रिया को कानून के हवाले करने के बजाय अपने पास रखने का फैसला किया।
उसने कार्तिक से सौदा किया। कार्तिक धीरे-धीरे परिवार, स्कूल, परिचितों और रिकॉर्ड में यह कहानी बनाएगा कि उसकी कोई बेटी थी ही नहीं। वह रहने की जगह बदलेगा और रिया से जुड़े सार्वजनिक निशान खत्म करेगा। जया दूसरी तरफ रिया की पहचान मिटाकर उसे अपनी बेटी की तरह पालेगी। श्वेता को मानसिक रूप से भ्रमित साबित करना इस योजना का सबसे जरूरी हिस्सा था।
इस रहस्य को सुरक्षित रखने के लिए जया ने एक-एक करके उन लोगों को हटाया जो सच जानते थे। शुरुआती नाइजीरियन अपराधियों की हत्या उसी सफाई अभियान का हिस्सा थी। बॉबी के मरने से भी एक गवाह खत्म हुआ। बाबू खान को चुप कराने की कोशिश हुई। अखबार के बाद नकली पिता बनकर ऋषि से मिलने वाला आदमी भी कहानी को भटकाने के लिए इस्तेमाल किया गया। यहां तक कि ऋषि को मारने भेजे गए गुंडों तक के पीछे वही नेटवर्क था।
जया आखिरी गवाह ऋषि को भी खत्म करना चाहती थी
जया यह सब बताते-बताते ऋषि पर गोली चलाती है और उसे घायल करती जाती है। अब उसके लिए ऋषि सबसे बड़ा खतरा है क्योंकि वह सारे बिंदु जोड़ चुका है। ऋषि दर्द में भी एक सवाल छोड़ने को तैयार नहीं—अगर कार्तिक रिया का पिता था, तो उसने अपनी बेटी को मरवाने की कोशिश क्यों की?
जया जवाब देने के बजाय उसे अंतिम गोली मारने वाली होती है। तभी इंस्पेक्टर रवि वहाँ पहुँचकर जया को गोली मार देता है। वह इसलिए समय पर पहुँचा क्योंकि ऋषि ने पहले फोन किया था और कॉल खुला छोड़ दिया था। रवि ने जया का पूरा कबूलनामा सुन लिया था। जया की मौत के बाद रिया सुरक्षित हो जाती है और कार्तिक को गिरफ्तार कर लिया जाता है।
कार्तिक का असली कारण
पुलिस स्टेशन में कार्तिक से पूछताछ होती है। अब भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक पिता अपनी बच्ची को क्यों मरवाना चाहेगा। कार्तिक बताता है कि कुछ महीने पहले वह और श्वेता दूसरे बच्चे की योजना के लिए डॉक्टर के पास गए थे। जांच के बाद डॉक्टर ने बताया कि कार्तिक की रिपोर्ट में ऐसी चिकित्सकीय समस्या है जिसके कारण उसका जैविक पिता बनना संभव नहीं।
कार्तिक ने तुरंत विरोध किया—उसकी पहले से एक बेटी है, तो रिपोर्ट गलत कैसे हो सकती है। डॉक्टर ने कहा कि अगर ऐसा है तो उसे पितृत्व और पुराने रिकॉर्ड की जांच करानी चाहिए। यहीं कार्तिक की दुनिया बदल गई। उसे समझ आया कि रिया उसकी जैविक बेटी नहीं हो सकती। उसने इसे पत्नी के विश्वासघात और अपनी बेइज्जती की तरह लिया। सच का सामना करने के बजाय उसने बच्ची को ही मिटा देने का निर्णय लिया।
वह बॉबी और अपराधियों के जरिए किडनैपिंग करवाता है ताकि रिया गायब हो जाए और बाद में उसके अस्तित्व को भी कहानी से मिटाया जा सके। लेकिन जया ने बच्ची को मरने नहीं दिया; उसने उसे अपने लिए रख लिया। इस तरह कार्तिक की हत्या की योजना और जया के मातृत्व जुनून ने मिलकर एक ऐसी झूठी वास्तविकता बना दी जिसमें श्वेता को पागल साबित किया गया।
रिया के पिता का अंतिम खुलासा
कार्तिक की बात सुनते हुए ऋषि अचानक चार साल पुराने समय की तारीखें जोड़ता है। भारत छोड़ने से पहले उसका और श्वेता का रिश्ता सिर्फ भावनात्मक नहीं रहा था। एक बार दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बना था। इसके तुरंत बाद परिस्थितियों ने उन्हें अलग कर दिया और श्वेता ने कार्तिक से शादी कर ली।
अब वह समझता है कि रिया कार्तिक की नहीं, बल्कि उसकी और श्वेता की बेटी है। यह सिर्फ एक जांच का अंतिम सुराग नहीं बल्कि ऋषि की अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा सच है। वह जिस बच्ची को पुरानी प्रेमिका की मदद के लिए खोज रहा था, वह उसकी अपनी संतान थी।
इसी एक सच से श्वेता का हर व्यवहार नया अर्थ लेने लगता है। उसने चार साल बाद सीधे ऋषि को इसलिए बुलाया क्योंकि वह अकेला ऐसा आदमी था जिस पर वह पूरी तरह भरोसा कर सकती थी और जो अनजाने में रिया का असली पिता भी था। वह यह राज तुरंत नहीं बता सकी, क्योंकि उसकी शादी, परिवार और पुराना फैसला सब उसके सामने थे। जब ऋषि ने सीसीटीवी देखकर गुस्से में कह दिया कि रिया है ही नहीं, तब श्वेता के लिए यह ऐसा था जैसे उसकी बेटी का असली पिता भी बच्ची को नकार रहा हो। अपराधबोध, अकेलापन और हर तरफ से अविश्वास ने उसे आत्महत्या तक पहुँचा दिया।
ऋषि रोते हुए रिया की ओर बढ़ता है। अब उसकी दुनिया कुछ ही क्षणों में बदल चुकी है। वह अमेरिका से सिर्फ एक पुराने वादे के कारण आया था, फिर एक गायब बच्ची की जांच में उतर गया, उसके अस्तित्व पर खुद शक किया, साजिश के बीच कई लोगों को खोया और आखिर जाना कि वह बच्ची उसकी अपनी बेटी है। यही फिल्म के नाम का अर्थ बनता है—एक क्षण पूरी जिंदगी की दिशा बदल सकता है। इसी भावनात्मक और चौंकाने वाले खुलासे के साथ कहानी समाप्त होती है।
रिया अब आखिर अपने असली पिता के सामने सुरक्षित थी।
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