कहानी बीसवीं सदी की शुरुआत के अमेरिका में खुलती है, प्रथम विश्व युद्ध के बाद का वह समय जब जंगलों को काटकर नए रेलरोड बनाए जा रहे थे और दूर-दराज के कस्बे धीरे-धीरे आधुनिक दुनिया से जुड़ रहे थे। इसी कठोर और बदलती दुनिया में रॉबर्ट नाम का एक साधारण मजदूर काम करता है। उसके पास न कोई बड़ी महत्वाकांक्षा है, न नाम कमाने की इच्छा। वह बस मेहनत करता है, मजदूरी लेता है और दिन निकलने देता है। लेकिन उसकी शांत जिंदगी के भीतर बचपन से जमा एक गहरा अकेलापन है।
रॉबर्ट जब केवल सात साल का था तभी अनाथालय में रह रहा था। वहाँ उसे ठीक से पढ़ना-लिखना भी नहीं आया। एक दिन वह अनाथालय छोड़कर ग्रेट नॉर्दर्न रेल में बैठा और बोनट्स फेरी नाम के कस्बे तक आ गया। वह शहर को नहीं जानता था और शहर में कोई उसे नहीं जानता था। कई दिनों तक भटकने के बाद किराने की छोटी दुकान में उसे मामूली काम मिला। धीरे-धीरे वह बड़ा हुआ। शिक्षा न होने के कारण उसके लिए सबसे आसान काम शारीरिक मजदूरी थी, इसलिए जंगल में लकड़ी काटना और रेल लाइन के लिए पेड़ गिराना उसकी रोजी बन गया।
उसकी जिंदगी में रोशनी ग्लेडिस नाम की युवती लेकर आती है। रॉबर्ट उसे पहली बार चर्च में देखता है और फिर सिर्फ उसे देखने के लिए अक्सर वहाँ जाने लगता है। ग्लेडिस भी उसके सीधे और शांत स्वभाव को पसंद करने लगती है। धीरे-धीरे दोनों करीब आते हैं और शादी कर लेते हैं। शहर से थोड़ी दूर, जंगल के भीतर बहती छोटी नदी के किनारे वे अपना घर बनाते हैं। पैसा बहुत कम है, सुविधाएँ लगभग नहीं, फिर भी उनके पास एक-दूसरे का साथ है और पहली बार रॉबर्ट को लगता है कि दुनिया में कोई जगह उसकी भी है।
रॉबर्ट पेड़ काटकर जो कमाता है उससे घर चलता है। काम हर मौसम में उपलब्ध नहीं होता, इसलिए कभी-कभी उसे परिवार को कई दिनों या महीनों के लिए छोड़कर दूर रेलरोड निर्माण पर जाना पड़ता है। वहाँ मजदूरी थोड़ी ज्यादा मिलती है। ग्लेडिस चाहती है कि वह स्थानीय काम करे ताकि घर से इतना दूर न रहे, लेकिन रॉबर्ट समझाता है कि कुछ साल ज्यादा कमाई कर लेने के बाद वे ऐसी व्यवस्था बना लेंगे जिसमें उसे लंबी यात्राएँ न करनी पड़ें।
रेल पुल पर हुई एक हत्या जिसने रॉबर्ट को बदल दिया
एक रेलरोड परियोजना में रॉबर्ट के साथ अलग-अलग शहरों और देशों से आए मजदूर काम करते हैं। सभी एक-दूसरे के लिए लगभग अजनबी हैं, लेकिन महीनों तक साथ रहने और कठिन काम साझा करने से अस्थायी दोस्ती बन जाती है। उनमें एक चीनी मजदूर भी है जो रॉबर्ट से सामान्य बातें करता है और चुपचाप अपना काम करता रहता है।
एक दिन कुछ मजदूर अचानक उस चीनी आदमी को पकड़ लेते हैं। रॉबर्ट पूछता है कि वे उसे कहाँ ले जा रहे हैं, मगर कोई जवाब नहीं देता। कुछ ही देर बाद वे उसे अधबने रेल पुल से नीचे फेंककर मार डालते हैं। रॉबर्ट सदमे में यह सब देखता रह जाता है। उस दौर में बाहर से आए लोगों, खासकर चीनी मजदूरों के खिलाफ गहरी नस्लीय नफरत थी। हत्या करने वालों के लिए वह आदमी इंसान से ज्यादा किसी ऐसी जाति का हिस्सा था जिससे वे घृणा करते थे।
रॉबर्ट ने खुद उसे नहीं मारा, मगर वह खुद को निर्दोष भी नहीं मान पाता। उसके मन में बार-बार सवाल आता है कि जब वे लोग उसे खींचकर ले जा रहे थे तब उसने रोकने की कोशिश क्यों नहीं की। शायद वह अकेला कुछ नहीं कर पाता, लेकिन कोशिश तो कर सकता था। उसकी आँखों के सामने उस आदमी की छवि बस जाती है और बाद में वह उसे सपनों तथा भ्रमों में बार-बार देखने लगता है। यह अपराधबोध उसकी पूरी जिंदगी के साथ चलता है।
काम खत्म होने के बाद वह मजदूरी लेकर घर लौटता है। ग्लेडिस और उनकी छोटी बेटी केट को देखकर उसकी सारी थकान गायब हो जाती है। केट अब चलने लगी है और रॉबर्ट उसे अपनी बाँहों में उठाकर ऐसे खुश होता है जैसे दुनिया में उससे बड़ी कोई उपलब्धि नहीं। परिवार जंगल के छोटे घर में खाना बनाता, नदी किनारे घूमता और कस्बे जाकर फोटो खिंचवाता है। उसके लिए यही जीवन की असली संपत्ति है।
घर और पैसे के बीच फँसा रॉबर्ट
ग्लेडिस उससे पूछती है कि दूर रेलरोड पर जाना जरूरी क्यों है। कई-कई दिन पिता और पति घर से गायब रहता है और केट उसके बिना बड़ी हो रही है। रॉबर्ट भी यही दर्द महसूस करता है। वह समझाता है कि दूर के काम में ज्यादा मजदूरी मिलती है और शायद कुछ साल बाद वे पैसे जोड़कर स्थानीय काम शुरू कर सकेंगे। तब वह परिवार के पास रह पाएगा।
ग्लेडिस व्यावहारिक योजना बनाती है। उनके खर्च का बड़ा हिस्सा भोजन पर जाता है। अगर वे अपने घर के पास जरूरत की फसलें उगाएँ और बचा हुआ सामान बेचें तो कुछ पैसा बच सकता है। उससे लकड़ी काटने की छोटी मिल या उपकरण खरीदे जा सकते हैं। रॉबर्ट को भी यह सपना पसंद आता है। लेकिन बीज, औजार और खेती शुरू करने के लिए शुरुआती पैसा चाहिए। इसलिए वह एक आखिरी लंबा रेलरोड काम करने का फैसला करता है। ग्लेडिस मन मारकर उसे विदा करती है।
रॉबर्ट फिर मजदूरों के शिविर में लौटता है। वहाँ अरनी नाम का बुजुर्ग भी काम करता है, जिससे वह पहले मिल चुका है। अरनी हँसमुख आदमी है, काम के बीच गाने गाता है, माउथ ऑर्गन बजाता है और बाकी मजदूरों का मन हल्का रखता है। उसकी दुनिया में कोई करीबी परिवार नहीं, इसलिए वह अपने अनुभव और किस्से रॉबर्ट से साझा करता है। दोनों की दोस्ती धीरे-धीरे गहरी हो जाती है।
इसी रेलरोड जीवन में डेविड नाम का एक आदमी भी मजदूरों को बाइबल पढ़कर सुनाता और धर्म की बातें करता है। एक दिन एक अश्वेत अमेरिकी शिविर में आता है और डेविड को ढूँढता है। डेविड उसे देखते ही भागने लगता है, लेकिन वह आदमी बंदूक निकालकर गोली मार देता है। सब मजदूर स्तब्ध रह जाते हैं। वह बताता है कि कई साल पहले डेविड ने नस्लीय नफरत में उसके छोटे भाई की बेरहमी से हत्या की थी और वह तभी से उसका पीछा कर रहा था। अब उसने बदला पूरा कर लिया है और बिना किसी के रोके वहाँ से चला जाता है।
रॉबर्ट इस घटना को भी अपने भीतर गहराई से महसूस करता है। उसे लगता है कि जिस आदमी ने दूसरों को धर्म और नैतिकता का उपदेश दिया, उसके अपने अतीत में हिंसा और घृणा भरी थी। वह उस चीनी मजदूर की हत्या याद करता है और सोचता है कि इंसानों के अच्छे-बुरे होने के नियम किताबों जितने सरल नहीं।
अरनी की बातें और जंगल की अस्थायी दुनिया
एक रात रॉबर्ट अपने मन की उलझन अरनी से साझा करता है। वह पूछता है कि अगर कोई आदमी किसी गलत घटना को रोक सकता था, लेकिन डर या कमजोरी के कारण कुछ नहीं कर पाया, तो क्या वह भी पापी है। अरनी इस सवाल का सीधा धार्मिक उत्तर नहीं देता। वह कहता है कि भूख और जीवन की कठिनाई में पाप-पुण्य के बड़े सिद्धांत कई बार छोटे पड़ जाते हैं। कुछ लोग गलतियाँ करते हुए भी खुश रहते हैं और कुछ अच्छे लोग सारी जिंदगी दुख ढोते हैं।
अरनी की बात रॉबर्ट को पूरी तरह संतुष्ट नहीं करती, मगर उसका बोझ थोड़ा हल्का होता है। दोनों काम के बाद गाना सुनते हैं, शराब का छोटा घूँट लेते हैं और अपनी-अपनी जिंदगी की बातें करते हैं। रॉबर्ट अक्सर परिवार की तस्वीर निकालकर ग्लेडिस और केट को देखता है। दूर जंगल में वही फोटो उसे याद दिलाती है कि सारी मेहनत आखिर किसके लिए है।
काम बेहद खतरनाक है। पेड़ों और भारी लकड़ी के बीच एक गलती जान ले सकती है। एक दुर्घटना में तीन मजदूर मर जाते हैं। किसी को उनके परिवारों का पता नहीं, इसलिए साथियों को उन्हें जंगल में ही सम्मान के साथ दफनाना पड़ता है। उनकी याद में उनके बूट पास के पेड़ पर कील से टाँग दिए जाते हैं। रॉबर्ट के सामने मौत धीरे-धीरे असामान्य चीज नहीं रहती; वह कामकाजी जिंदगी का हिस्सा बन जाती है।
कई महीने बाद वह घर लौटता है। केट को बड़ा होते देखकर वह भावुक हो जाता है। अब उसे पहले से ज्यादा यकीन है कि ग्लेडिस सही कहती है। वह बेटी का बचपन लगातार खो रहा है। इसलिए वह स्थानीय फार्म मालिक जैक के यहाँ कम मजदूरी पर काम करना शुरू करता है, ताकि हर शाम घर लौट सके।
जैक भला आदमी है। ग्लेडिस खेती की अपनी योजना और आगे छोटी लकड़ी मिल खोलने का सपना रॉबर्ट के साथ बनाती रहती है। पैसा कम है, लेकिन परिवार पास है। फिर एक बार उन्हें शुरुआती निवेश के लिए ज्यादा धन की जरूरत पड़ती है और रॉबर्ट मजबूरी में एक आखिरी सीजन के लिए दूर काम स्वीकार कर लेता है। विदा लेते हुए ग्लेडिस और केट दोनों उदास हैं। उसे भी डर है कि फिर कई महीने बेटी को बढ़ते नहीं देख पाएगा।
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