कहानी की शुरुआत सोलह साल के जैकब से होती है, जो एक स्टोर में काम करता है और बाहर से बिल्कुल साधारण किशोर दिखाई देता है। उसकी जिंदगी में सबसे खास इंसान उसके दादाजी इब्राहिम हैं। बचपन से इब्राहिम उसे ऐसी कहानियाँ सुनाते आए थे जिनमें जादुई शक्तियों वाले बच्चे, समय में अटकी एक रहस्यमय जगह और पक्षी का रूप लेने वाली मिस पेरेग्रिन शामिल थीं। छोटा जैकब इन बातों पर पूरा विश्वास करता था, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ स्कूल के बच्चों ने उसका मजाक उड़ाया और उसने भी मान लिया कि दादाजी उसे बहलाने के लिए कल्पनाएँ सुनाते थे।
एक शाम काम खत्म होने के बाद स्टोर में साथ काम करने वाली महिला जैकब को घर छोड़ने निकलती है। रास्ते में वह इब्राहिम को फोन करता है। इस बार दादाजी की आवाज सामान्य नहीं होती। वे बेहद घबराए हुए हैं और बार-बार कहते हैं कि जैकब किसी भी हालत में उनके घर न आए, क्योंकि वहाँ बहुत बड़ा खतरा है। जैकब इसे फिर उनकी पुरानी विचित्र बातों का हिस्सा समझकर गंभीरता से नहीं लेता और सीधे उनके घर पहुँच जाता है।
अंदर कदम रखते ही उसे पूरा घर बिखरा हुआ मिलता है। अलमारियाँ खुली हैं, चीजें फर्श पर पड़ी हैं और ऐसा लगता है जैसे किसी ने घर का हर कोना छान मारा हो। पीछे की टूटी रेलिंग देखकर जैकब जंगल की ओर बढ़ता है। कुछ दूर जाने पर उसे इब्राहिम जमीन पर गंभीर रूप से घायल पड़े दिखाई देते हैं। जैकब घबरा जाता है और मदद के लिए फोन निकालता है, मगर इब्राहिम उसका हाथ पकड़ लेते हैं।
टूटती साँसों के बीच वे उससे कहते हैं कि उसे आयरलैंड जाना होगा। वहाँ एक खास पक्षी उसे सारी सच्चाई बताएगा। वे तारीख भी बताते हैं—3 सितंबर 1943—और कहते हैं कि जैकब को उसी कालचक्र के भीतर जाना होगा। जैकब इन शब्दों का मतलब नहीं समझता, लेकिन दादाजी की अंतिम इच्छा पूरी करने का वादा कर देता है। अगले ही पल इब्राहिम की मृत्यु हो जाती है।
जैकब सदमे में पीछे मुड़ता है और कुछ क्षण के लिए जंगल में एक भयावह, लंबी और असामान्य परछाई देखता है। उसके साथ आई महिला भी आवाज सुनकर उधर गोली चलाती है, लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिलता। पुलिस बाद में जाँच करके इब्राहिम की मौत को किसी जंगली जानवर का हमला मानती है। जैकब जानता है कि उसने कुछ देखा था, मगर उसके पास कोई प्रमाण नहीं।
दादाजी की कहानियाँ फिर सच लगने लगीं
लगभग एक महीना बीत जाता है। इब्राहिम की मौत और जंगल वाली आकृति जैकब के दिमाग से नहीं निकलती। उसकी मानसिक हालत खराब होने लगती है और परिवार उसे मनोचिकित्सक के पास ले जाता है। वहाँ बैठकर जैकब अपने बचपन की बातें याद करता है। इब्राहिम हमेशा आयरलैंड की एक रहस्यमय जगह का जिक्र करते थे, जहाँ अलग-अलग जादुई क्षमताओं वाले बच्चे रहते थे। उनकी देखभाल मिस पेरेग्रिन करती थीं और जरूरत पड़ने पर वह पक्षी बन सकती थीं।
जब जैकब छोटा था तो वह हर कहानी को सच मानता था। बाद में स्कूल में मजाक बनने पर उसने दादाजी की बातों को कल्पना समझना शुरू कर दिया। फिर भी इब्राहिम हमेशा यही कहते रहे कि उन्होंने उससे कभी झूठ नहीं बोला। अब उनकी रहस्यमय मौत और अंतिम संदेश के बाद जैकब के भीतर वही पुराने सवाल लौट आते हैं।
कुछ समय बाद वह इब्राहिम का घर खाली कराने जाता है। उसकी आंटी पुराने सामान के बीच कुछ चीजें उसे सौंपती है। उन्हीं में एक पोस्टकार्ड मिलता है जो मिस पेरेग्रिन ने इब्राहिम के नाम भेजा था। उसमें लिखा है कि वह और बाकी बच्चे आज भी उनका इंतजार कर रहे हैं। यह किसी बच्चे के लिए बनाई गई कहानी नहीं, वास्तविक डाक है। जैकब का संदेह और गहरा हो जाता है।
वह पोस्टकार्ड अपनी मनोचिकित्सक को दिखाता है और कहता है कि शायद आयरलैंड जाकर सब कुछ अपनी आँखों से देखना ही एकमात्र तरीका है जिससे वह भ्रम और वास्तविकता का फर्क समझ सके। मनोचिकित्सक भी यात्रा का समर्थन करती है। जैकब अपने पिता के साथ आयरलैंड जाने का फैसला करता है। उसके पिता पक्षियों पर किताब लिख रहे हैं, इसलिए यह यात्रा उनके काम के लिए भी उपयोगी लगती है।
आयरलैंड का खंडहर और एक असंभव मुलाकात
समुद्र पार करते समय जैकब आसमान में एक पक्षी देखता है और उसे तुरंत दादाजी की कहानी याद आती है। कुछ देर बाद वह और उसके पिता दूर, सुनसान द्वीप पर पहुँचते हैं। जैकब सीधे उस अनाथालय की तरफ जाता है जिसके बारे में वह वर्षों से सुनता आया था। लेकिन वहाँ पहुँचकर उसकी सारी उम्मीद टूट जाती है। इमारत खंडहर बनी हुई है। उसे बताया जाता है कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान वहाँ बम गिरा था और उसके बाद से वह जगह वीरान है।
जैकब वापस लौट तो आता है, पर उसका मन नहीं मानता। अगली सुबह वह अकेले फिर खंडहर पहुँचता है। अंदर घूमते समय उसे बार-बार महसूस होता है कि कोई उसे देख रहा है। अचानक सामने एक छोटी लड़की आती है। वह जैकब को देखकर इब्राहिम का नाम लेती है और फिर तेजी से भाग जाती है। जैकब उसके पीछे दौड़ता है, जल्दबाजी में गिरता है और बेहोश हो जाता है।
आँख खुलने पर वह खुद को ऐसे बच्चों के बीच पाता है जिनके चेहरे उसे दादाजी की कहानियों से परिचित लगते हैं। वह चौंककर पूछता है कि क्या वे सब मर चुके हैं, क्योंकि उसके हिसाब से यह अनाथालय तो दशकों पहले बम से नष्ट हो चुका था। बच्चे मुस्कुराकर कहते हैं कि वे बिल्कुल जिंदा हैं।
अब जैकब उनकी अनोखी क्षमताएँ देखता है। एक लड़का कपड़े उतार दे तो पूरी तरह अदृश्य हो जाता है। एमा हवा से भी हल्की है और जमीन पर बने रहने के लिए भारी लोहे के जूते पहनती है। सुनहरे बालों वाली एक लड़की के हाथ जिस चीज को छूते हैं वह जलने लगती है, इसलिए वह दस्ताने पहनती है। एक लड़की में कई लोगों जितनी ताकत है। एक लड़के के पेट में मधुमक्खियाँ रहती हैं। किसी के सिर के पीछे दूसरा मुँह है और कोई अपने सपने दूसरों को दिखा सकता है।
जैकब धीरे-धीरे समझने लगता है कि इब्राहिम ने जो बताया था, वह कल्पना नहीं था। वही लड़की जिसने उसे दादाजी समझ लिया था, बताती है कि जैकब चेहरा और अंदाज में इब्राहिम जैसा दिखाई देता है। बच्चे उसे जल्दी अपने साथ चलने को कहते हैं, क्योंकि अगर बाहर के किसी आदमी ने उन्हें देख लिया तो बड़ी परेशानी हो सकती है। वे उसे एक गुफा के रास्ते ले जाते हैं।
2016 से 1943 तक एक कदम
डर और उलझन में जैकब एक बार बच्चों से दूर भागकर उस गेस्ट हाउस में लौटता है जहाँ वह अपने पिता के साथ ठहरा है। लेकिन वहाँ पहुँचकर सब कुछ अलग लगता है। लोग उसे शक से देखते हैं और मैनेजर उसे पहचानने से इनकार कर देता है। कुछ लोग उसे जासूस समझकर पकड़ लेते हैं। जैकब बार-बार कहता है कि वह सिर्फ पर्यटक है, मगर कोई विश्वास नहीं करता।
तभी कमरे में रखे गिलास और प्लेटें अपने आप उड़ने लगते हैं। सब लोग घबरा जाते हैं। उसी अफरातफरी में सुनहरे बालों वाली लड़की आती है, जैकब का हाथ पकड़ती है और बाहर ले जाती है। जाते-जाते वह दरवाजे को छूती है और उसमें आग लग जाती है, जिससे पीछा करने वाले रुक जाते हैं। बच्चे जैकब को घोड़ागाड़ी में बैठाकर ले जाते हैं।
रास्ते में वे उसे सबसे बड़ा सच बताते हैं। यह 2016 नहीं, बल्कि 3 सितंबर 1943 है। वह गुफा साधारण रास्ता नहीं बल्कि समय के कालचक्र का प्रवेश है। जैकब सिर्फ द्वीप के किसी दूसरे हिस्से में नहीं गया था; वह समय के भीतर पीछे चला गया था।
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