Miss Peregrine’s Home for Peculiar Children (2016) Fantasy Adventure Movie Explained in Hindi

August 10, 2026 18 min read
Miss Peregrine's Home for Peculiar Children poster

Movie Details

Year
2016
Rating
★ 6.8/10
Runtime
127 min
Genres
Adventure, Fantasy
Director
Tim Burton

Where to watch

Availability detected for India
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कहानी की एक झलक

आगे क्या होने वाला है?

दादाजी की रहस्यमय मौत के बाद जैकब एक दूर द्वीप पर पहुँचता है, जहाँ समय 3 सितंबर 1943 पर अटका हुआ है और अनोखी शक्तियों वाले बच्चे छिपकर रहते हैं। जल्द ही उसे पता चलता है कि उसके भीतर भी एक दुर्लभ शक्ति है और वही बच्चों को अदृश्य दैत्यों से बचाने की सबसे बड़ी उम्मीद बन सकती है।

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OFFICIAL TRAILER

आप भाग 3 पढ़ रहे हैं पूरी कहानी: लगभग 21 मिनट
इस भाग में लगभग 1325 शब्द हैं।

डूबे जहाज से बैरन के ठिकाने तक

जैकब सब बच्चों को इकट्ठा करता है। अब उनके पास पीछे लौटने के लिए घर नहीं। एक ही लक्ष्य बचा है—मिस पेरेग्रिन को बैरन के कब्जे से छुड़ाना। बच्चों को अंदाजा है कि बैरन उन्हें कहाँ ले गया होगा। वे समुद्र किनारे पहुँचते हैं।

एमा अपनी शक्ति का इस्तेमाल करके समुद्र की गहराई में डूबे पुराने जहाज को ऊपर उठाती है। जहाज के भीतर पुराने कंकाल पड़े हैं, लेकिन किसी के पास उन पर सोचने का समय नहीं। सभी बच्चे जहाज पर सवार होते हैं और बैरन के ठिकाने की ओर निकल पड़ते हैं। समुद्र में एमा पूरे जहाज को संतुलित रखने में मदद करती है। डर अब भी है, लेकिन इस बार हर बच्चे के चेहरे पर अपने संरक्षक को वापस लाने का दृढ़ इरादा है।

ठिकाने के पास पहुँचकर वे अलग-अलग रास्तों से भीतर घुसने की योजना बनाते हैं। एमा सबसे पहले बैरन के सामने पहुँचती है और उसे चेतावनी देती है कि अगर उसने मिस पेरेग्रिन और बाकी एम्ब्रिन को तुरंत नहीं छोड़ा तो उसे इसका परिणाम भुगतना होगा। वह यह भी बताती है कि उसका एक अदृश्य दैत्य पहले ही मारा जा चुका है। बैरन यह सुनकर क्रोधित हो जाता है और अपने साथियों तथा बाकी दैत्यों को बच्चों के पीछे भेज देता है।

जैकब की आँखें बनीं पूरी टीम का हथियार

बाहर लड़ाई शुरू होती है। बाकी बच्चे अदृश्य दैत्यों को नहीं देख सकते, मगर जैकब उनकी हर दिशा पहचान लेता है। वह जोर-जोर से अपने साथियों को बताता रहता है कि कौन सा दैत्य कहाँ है और किस दिशा से हमला आने वाला है। उसी जानकारी से बाकी बच्चे वार कर पाते हैं। पहली बार जैकब अपनी शक्ति को डर की वजह नहीं बल्कि पूरी टीम की सबसे बड़ी रक्षा के रूप में इस्तेमाल करता है।

इनॉक अपनी खास क्षमता का उपयोग करता है। डूबे जहाज के भीतर पड़े कंकालों को वह फिर चलने लायक जिंदा कर देता है। देखते ही देखते जहाज पर कंकालों की पूरी सेना खड़ी हो जाती है और वे अदृश्य दैत्यों से भिड़ जाते हैं। लड़ाई के दौरान दैत्यों पर ऐसा पदार्थ लग जाता है जिससे उनके शरीर दिखाई देने लगते हैं। अब केवल जैकब ही नहीं, सभी बच्चे उन्हें देख सकते हैं।

कंकाल और बच्चे मिलकर एक-एक दैत्य का अंत करना शुरू करते हैं। कहीं ताकतवर बच्ची दुश्मनों को दूर फेंकती है, कहीं आग की शक्ति रास्ता साफ करती है, तो कहीं हवा का इस्तेमाल साथियों को बचाने में होता है। हर बच्चा वही क्षमता इस्तेमाल करता है जिसे कभी उसकी कमजोरी या अजीबपन समझा जाता था। अब वही शक्तियाँ उनकी रक्षा का हथियार हैं।

दो जैकब और बैरन की आखिरी चाल

जैकब और कुछ बच्चे अंततः उस कमरे तक पहुँचते हैं जहाँ मिस पेरेग्रिन और दूसरी एम्ब्रिन कैद हैं। वे पिंजरे खोलने की कोशिश करते हैं, तभी बैरन वहाँ पहुँच जाता है। वह अपनी रूप बदलने की क्षमता का इस्तेमाल करके बिल्कुल जैकब जैसा बन जाता है। कमरे में एक साथ दो जैकब खड़े हैं और कोई बच्चा समझ नहीं पाता कि असली कौन है।

स्थिति बेहद खतरनाक है, क्योंकि गलत व्यक्ति पर हमला हुआ तो वे अपने ही दोस्त को मार सकते हैं। तभी असली जैकब अपनी ओर बढ़ता अदृश्य दैत्य देखता है। उसके मन में तुरंत उपाय आता है। वह जोर से कहता है कि अब असली और नकली का फैसला खुद हो जाएगा। बैरन को उसकी बात का अर्थ समझ नहीं आता, क्योंकि वह दैत्य उसे दिखाई नहीं देता।

दैत्य सामने खड़े बैरन को, जिसने जैकब का रूप लिया है, असली जैकब समझकर उसी पर झपट पड़ता है। हमला इतना भयानक होता है कि बैरन अपना भेष बनाए नहीं रख पाता और उसका असली चेहरा सबके सामने आ जाता है। दैत्य उसकी आँखें निकाल लेता है और बैरन गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ता है। बच्चों को तुरंत असली जैकब की पहचान हो जाती है।

अब जैकब और बाकी साथी मिलकर आखिरी अदृश्य दैत्य पर टूट पड़ते हैं और उसे भी खत्म कर देते हैं। बैरन की मौत के साथ उसका खेल समाप्त हो जाता है और उसके बचे हुए साथी भी एक-एक करके हार जाते हैं। बच्चे मिस पेरेग्रिन तथा बाकी एम्ब्रिन को आजाद कर देते हैं।

जीत के बाद भी समय की समस्या

मिस पेरेग्रिन बच्चों को देखकर राहत महसूस करती हैं, लेकिन तुरंत एक नई समस्या याद दिलाती हैं। वे अपने असली समय और कालचक्र से बहुत दूर हैं। अगर बच्चे लंबे समय तक कालचक्र के बाहर रहे तो उनकी उम्र तेजी से बढ़ने लगेगी और उनकी जान खतरे में पड़ सकती है। इसलिए सभी को जल्द अपने सुरक्षित समय की ओर लौटना होगा।

एमा जैकब के पास आती है। दोनों के बीच अब गहरा रिश्ता बन चुका है। फिर भी वह कहती है कि जैकब को अपने समय में रहना चाहिए, क्योंकि वहाँ उसकी अपनी जिंदगी और जिम्मेदारियाँ हैं। जैकब उसे रोकना चाहता है, लेकिन समझता है कि बच्चों को अपने समय में लौटना जरूरी है। मिस पेरेग्रिन उन्हें लेकर चली जाती हैं और जैकब भारी मन से वापस घर की ओर लौटता है।

इब्राहिम फिर जीवित कैसे मिले

घर पहुँचते ही जैकब सबसे बड़ा चमत्कार देखता है। उसके दादाजी इब्राहिम उसके सामने जिंदा खड़े हैं। समय में हुई घटनाओं के बदलने से वह भविष्य बदल चुका था जिसमें इब्राहिम की हत्या हुई थी। जैकब बिना कुछ सोचे दौड़कर उन्हें गले लगा लेता है। इब्राहिम भी समझ जाते हैं कि पोते ने वह यात्रा पूरी कर ली जिसकी उन्हें उम्मीद थी।

जैकब चाहता है कि अब सब कुछ पहले जैसा हो जाए, मगर इब्राहिम बताते हैं कि उसकी मंजिल अभी खत्म नहीं हुई। जिस इंसान का इंतजार उसे करना चाहिए वह कोई और नहीं बल्कि एमा है। वह जैकब को पुराना नक्शा देते हैं जिसमें दुनिया भर के अलग-अलग कालचक्रों के रास्ते बने हैं।

समस्या यह है कि एमा जिस कालचक्र से गई है, वहाँ सीधा पहुँचना अब संभव नहीं। रास्ता हमेशा के लिए बदल चुका है। अगर जैकब उससे दोबारा मिलना चाहता है तो उसे कई अलग-अलग कालचक्रों से गुजरना होगा। हर कालचक्र उसे समय के किसी और पड़ाव तक पहुँचाएगा और धीरे-धीरे वह उस तारीख तक पहुँच सकता है जहाँ एमा की यात्रा फिर उससे मिलेगी।

एमा तक पहुँचने के लिए समय के पार यात्रा

जैकब बिना सवाल किए नक्शा अपने पास रख लेता है और नई यात्रा शुरू करता है। वह एक कालचक्र से दूसरे कालचक्र में जाता है, अलग-अलग समय और जगहों से गुजरता है। हर रास्ता उसे अपने लक्ष्य के थोड़ा और करीब ले जाता है। यह सफर आसान नहीं। उसे कई जगह अपनी पहचान छिपानी पड़ती है और यह ध्यान रखना पड़ता है कि समय की ऐसी घटनाओं में हस्तक्षेप न करे जिनसे पूरा भविष्य बदल सकता है।

लंबे सफर के बाद वह 1942 तक पहुँच जाता है। लेकिन एमा जिस दिन वहाँ आने वाली है वह 3 सितंबर 1943 है। यानी जैकब को पूरे एक साल इंतजार करना होगा। वह उस समय की दुनिया में अपनी पहचान छिपाकर रहता है और सही दिन आने तक धैर्य रखता है। वह जानता है कि जल्दी करने से कुछ हासिल नहीं होगा; समय को उसके तय बिंदु तक पहुँचने देना ही होगा।

आखिर 3 सितंबर 1943 आता है। वही जहाज वहाँ पहुँचने वाला है जिस पर एमा और बाकी बच्चे यात्रा कर रहे हैं। जैकब पहले से किनारे पर उनका इंतजार कर रहा होता है। जहाज से एमा उतरती है और उसकी नजर सीधे जैकब पर पड़ती है। दोनों कुछ क्षण एक-दूसरे को देखते हैं, फिर बिना कुछ कहे दौड़ते हैं और गले लग जाते हैं।

जैकब ने दादाजी की मौत की सच्चाई खोजने के लिए यात्रा शुरू की थी, लेकिन रास्ते में उसे अपने परिवार का इतिहास, अपनी दुर्लभ शक्ति, एक पूरा छिपा संसार और ऐसे दोस्त मिले जिन्हें बचाने के लिए उसने खुद को बदल दिया। सबसे बड़ा बदलाव यह था कि जो लड़का कभी दादाजी की कहानियों पर शर्म महसूस करता था, वही अंत में उन कहानियों की दुनिया का हिस्सा बन गया। एमा से पुनर्मिलन के साथ उसके लिए नई शुरुआत होती है और कहानी यहीं समाप्त होती है।

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