कहानी की शुरुआत थाईलैंड की एक अंधेरी जेल से होती है। एक सेल में ली नाम का आदमी चुपचाप बैठा है और सामने रखे कागज के छोटे से टुकड़े पर बेहद बारीकी से काम कर रहा है। वह अपनी उंगलियों और कलाकार वाली नजर से एक नकली डाक स्टैम्प बना रहा है। देखने में वह स्टैम्प इतना सटीक है कि असली और नकली का फर्क लगभग मिट जाता है। ली कोई मामूली कैदी नहीं है। वह बेहद कुशल कलाकार है और उसकी सबसे बड़ी ताकत किसी चीज को हूबहू दोहराने की क्षमता है।
ली जेल से किसी को एक जरूरी चिट्ठी भेजना चाहता है। मुश्किल यह है कि जेल का पोस्टमैन बिना पैसे के पत्र नहीं लेता और ली के पास एक रुपया भी नहीं। इसलिए वह असली जैसी स्टैम्प बनाकर पत्र तैयार करता है। पोस्टमैन आता है और उससे पैसे मांगता है। तभी सामने वाली सेल में बैठा एक बूढ़ा कैदी अचानक बीमारी का नाटक करके जोर-जोर से चिल्लाने लगता है। पोस्टमैन का ध्यान उसकी तरफ जाता है और ली उसी छोटे से मौके का फायदा उठाकर अपना पत्र चुपचाप पोस्टमैन के बैग में डाल देता है। यह चिट्ठी किसके लिए है और उसमें क्या लिखा है, यह बात फिल्म आखिर में जाकर खोलती है।
कुछ समय बाद हांगकांग पुलिस ली को थाईलैंड की जेल से निकालकर अपनी कस्टडी में ले आती है। इंस्पेक्टर हो उसे पूछताछ कक्ष में बैठाकर उसके खिलाफ लगे आरोप एक-एक करके पढ़ता है। उस पर नकली नोट बनाने का आरोप है। दो साल पहले कनाडा में सेंट्रल बैंक की एक गाड़ी पर हमला हुआ था जिसमें कई गार्ड मारे गए थे। इसके बाद शहर में और भी हिंसक घटनाएँ हुईं। पुलिस को शक है कि इनके पीछे एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह था और ली सीधे इन अपराधों से जुड़ा हुआ है।
पुलिस के पास केवल शक नहीं, बल्कि फोरेंसिक सबूत भी हैं। अपराध-स्थलों से मिले खून और बाल के नमूने ली के नमूनों से मेल खाते हैं। इंस्पेक्टर हो उसे सच कबूल करने के लिए दबाव में रखता है। मगर ली लगातार कहता है कि वह असली मास्टरमाइंड नहीं। वह बार-बार पेंटर नाम के एक खतरनाक अपराधी का जिक्र करता है। उसके अनुसार पेंटर ही पूरी गैंग चलाता था। पेंटर का नाम लेते ही ली घबरा जाता है और दावा करता है कि अगर उसने ज्यादा बोला तो पेंटर उसे खोजकर मार देगा। वह पुलिस से जल्दी वापस जेल भेजने तक की गुहार लगाता है।
उसी समय पुलिस स्टेशन के बाहर युवान नाम की एक महिला एक वकील के साथ इंतजार कर रही है। वह ली को छुड़ाने आई है। पुलिस उसे बताती है कि ली कई बड़े मामलों का अहम गवाह है, इसलिए उसकी जमानत आसानी से नहीं हो सकती। फिर एक शर्त रखी जाती है। अगर ली पेंटर की असली पहचान बता दे तो उसकी जमानत पर विचार किया जाएगा। युवान खुद ली के सामने जाती है और उससे सब सच-सच बताने की विनती करती है। उसके कहने पर ली आखिर अतीत की कहानी खोलता है।
कलाकार ली और युवान का पुराना रिश्ता
फ्लैशबैक में ली और युवान दोनों कलाकार दिखाई देते हैं। वे साथ रहते हैं और कला ही वह चीज है जिसने उन्हें करीब लाया। युवान मौलिक पेंटिंग बनाती है। उसकी अपनी कल्पना, रंगों की अपनी भाषा और अलग शैली है। दूसरी ओर ली की प्रतिभा अलग है। वह किसी मशहूर कलाकार की पेंटिंग देखकर उसे लगभग हूबहू दोहरा सकता है। तकनीकी तौर पर उसका काम कमाल का है, लेकिन कला की दुनिया में उसे मौलिक कलाकार नहीं माना जाता।
एक दिन लुक नाम का गैलरी मालिक उनके काम को देखने आता है। वह युवान की पेंटिंग देखकर प्रभावित हो जाता है और उसकी सारी पेंटिंग खरीदने या प्रदर्शनी में लगाने की इच्छा जताता है। लेकिन ली की पेंटिंग देखकर वह साफ कह देता है कि ये दूसरे कलाकारों के काम की कॉपी हैं, इसलिए उसे इनमें रुचि नहीं। युवान को यह बात चुभती है। वह लुक से कहती है कि अगर वह काम खरीदेगा तो दोनों का खरीदेगा, वरना एक भी नहीं।
लुक के जाने के बाद ली युवान से कहता है कि उसकी चिंता करने की जरूरत नहीं। वह दावा करता है कि टोक्यो का कोई खरीदार पहले ही उसकी सारी पेंटिंग ले चुका है। कुछ समय बाद युवान समझ जाती है कि यह झूठ था। ली की कोई पेंटिंग नहीं बिकी थी। उसने केवल इसलिए झूठ बोला था ताकि युवान को उसके कारण अपना मौका न गंवाना पड़े। ली अपनी असफलता छिपाता है, क्योंकि वह युवान की तरक्की से खुश तो है, पर अंदर से खुद को पीछे छूटा हुआ भी महसूस करता है।
प्रदर्शनी वाले दिन युवान चुपके से ली की एक पेंटिंग अपनी पेंटिंगों के पास रख देती है। लोग उसके काम की तारीफ करते हैं। तभी एक आदमी ली की पेंटिंग देखकर उसका मजाक उड़ाता है। युवान भड़क जाती है और उस पर पानी फेंक देती है। प्रदर्शनी खत्म होने के बाद ली उस आदमी से माफी मांगने जाता है। आदमी हँसकर बताता है कि वह तो जानबूझकर ली का अपमान कर रहा था ताकि ली खुद उससे अकेले मिलने आए। पूरी प्रदर्शनी में उसी ने ली की पेंटिंग खरीदी थी।
रेस्टोरेंट में वह आदमी अपना परिचय पेंटर के रूप में देता है। वह ली की नकल करने की क्षमता की तारीफ करता है। उसके अनुसार किसी तस्वीर, रेखा या चित्र को इतनी सटीकता से कॉपी कर पाना असाधारण हुनर है। पेंटर कहता है कि ली का यह हुनर कला दीर्घा में भले कम दाम पाए, लेकिन उसके काम में इसकी कीमत बहुत ज्यादा है। अगले दिन ली उससे फिर मिलता है। पेंटर एक अमेरिकी डॉलर सामने रखकर कहता है कि इसे हूबहू तैयार करना है।
ली तुरंत भड़क जाता है। उसे समझ आ जाता है कि सामने वाला जाली मुद्रा बनाने की बात कर रहा है। वह प्रस्ताव ठुकरा देता है। तब पेंटर अपना असली नाम सेंग बताता है और कहता है कि उसका परिवार तीन पीढ़ियों से नकली नोट बनाने के धंधे में है। वह गर्व से दावा करता है कि उनका काम इतना सावधानी से होता है कि परिवार का कोई सदस्य जेल नहीं गया। ली फिर भी इंकार करता है, लेकिन पेंटर उसे नए डॉलर की जटिलता समझाना शुरू करता है।
अमेरिकी डॉलर की नकल का असंभव मिशन
पेंटर बताता है कि नए डॉलर पर मौजूद तस्वीरें, छोटे अक्षर, सूक्ष्म पैटर्न और सुरक्षा परतें इतनी जटिल हैं कि महंगे प्रिंटर भी उन्हें पूरी तरह कॉपी नहीं कर सकते। नोट पर बेंजामिन फ्रैंकलिन की तस्वीर है, कॉलर के आसपास बेहद छोटे अक्षर हैं और कई बारीक डिजाइन परतों में बने हैं। इसके अलावा नोट पर ऐसा विशेष इंक इस्तेमाल होता है जो एक कोण से बैंगनी और दूसरे कोण से सुनहरा दिखाई देता है। यही रंग बदलने वाला प्रभाव नकली नोट बनाने वालों के लिए बहुत बड़ी चुनौती है।
पेंटर ली से कहता है कि मशीन वहाँ तक नहीं पहुँच सकती जहाँ उसके हाथ पहुँच सकते हैं। उसे ऐसे कलाकार की जरूरत है जो सुरक्षा डिजाइन हाथ से तैयार करे। ली पहले मना करता है, मगर उसकी आर्थिक हालत खराब है। उसे लगता है कि युवान उससे बहुत आगे निकल रही है और वह खुद केवल कॉपी करने वाला कलाकार बनकर रह गया है। इसी कमजोरी का फायदा पेंटर उठाता है। आखिर ली प्रस्ताव स्वीकार कर लेता है।
उस समय युवान एक प्रदर्शनी के लिए अमेरिका जाने वाली होती है। ली उसे अपने फैसले के बारे में कुछ नहीं बताता। वह चुपचाप पेंटर के साथ निकल जाता है। पेंटर उसे विमान से कनाडा ले जाता है और वहाँ अपनी पूरी टीम से मिलाता है। टीम के सदस्य लंबे समय से नकली मुद्रा के काम में हैं और हर व्यक्ति किसी खास हिस्से का विशेषज्ञ है। कोई मशीन संभालता है, कोई कागज और रंग का इंतजाम, कोई वितरण और तस्करी का नेटवर्क। मगर सबसे मुश्किल डिजाइन और वॉटरमार्क का काम ली को करना है।
टीम पुराने चीनी कलाकारों की तकनीक से प्रेरणा लेकर तीन अलग परतों में डिजाइन तैयार करने की योजना बनाती है। बीच वाली परत पर ली को बेहद महीन वॉटरमार्क बनाना है। वह पहले अभ्यास नोट तैयार करता है। जब बाकी लोग उसके हाथ से बनाया नोट देखते हैं तो दंग रह जाते हैं। उसकी रेखाएँ इतनी सटीक हैं कि वह केवल किसी तस्वीर की नकल नहीं कर रहा, बल्कि मशीन से भी ज्यादा नियंत्रित तरीके से सूक्ष्म डिजाइन खींच रहा है।
इसके बाद टीम पूर्वी यूरोप जाती है, जहाँ एक नीलामी में पुरानी बैंक नोट छापने वाली भारी मशीन बिक रही होती है। वे वह मशीन खरीद लेते हैं। अब अगली समस्या असली नोट जैसा कागज है। पेंटर जानकारी जुटाकर बताता है कि जिस स्तर के कागज से अमेरिकी नोट बनते हैं, उसी गुणवत्ता का कागज कुछ टेलीफोन डायरेक्टरी छापने में भी इस्तेमाल होता है। टीम उस प्रिंटिंग स्रोत तक पहुँचती है और भारी मात्रा में कागज खरीद लेती है।
मशीन, कागज और ली की डिजाइनिंग मिलते ही नोट छपने लगते हैं। बड़े-बड़े ढेर बाहर आते हैं और पहली नजर में वे असली जैसे लगते हैं। मगर अभी भी सबसे अहम कमी मौजूद है: रंग बदलने वाला खास इंक। उस इंक के बिना नोट की सुरक्षा जांच में भंडाफोड़ हो सकता है। पेंटर पता लगाता है कि ऐसा इंक सरकारी नियंत्रण में है और खुले बाजार से नहीं खरीदा जा सकता। उसे हासिल करने के लिए वह सीधी लूट की योजना बनाता है।
Comments are shared across all parts of this story.