कहानी की शुरुआत इंडोनेशिया के पास मौजूद एक सुनसान और घने जंगल वाले द्वीप से होती है। इस द्वीप के बारे में लंबे समय से अफवाह है कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापानी सेना ने यहाँ भारी मात्रा में सोना और कीमती सामान छिपाया था। कहा जाता है कि जो भी उस खजाने तक पहुँच जाए उसकी कई पीढ़ियाँ बदल सकती हैं। लेकिन समस्या यह है कि इस द्वीप से जुड़ी कहानियों में जितनी दौलत का जिक्र है, उतना ही डर भी छिपा है। जो लोग इसकी गहराई तक गए, उनमें से बहुत कम वापस लौट पाए।
जंगल के बीच कुछ गैंगस्टर पहले से डेरा डाले हुए हैं। उन्हें आसपास की खोजबीन में कई पुरानी वस्तुएँ मिली हैं। पहली नजर में वे चीजें बेकार कबाड़ जैसी लगती हैं, मगर ब्लैक मार्केट में उनकी कीमत बहुत हो सकती है। सभी खुश हैं और अपने मिलने वाले पैसों की कल्पना कर रहे हैं। इसी दौरान उनमें से एक आदमी बाकी लोगों से थोड़ा दूर निकल जाता है।
मिट्टी में उसे लोहे का एक बहुत पुराना मास्क दिखाई देता है। मास्क की बनावट ऐसी है जैसी सामान्य सैनिक उपकरण में नहीं मिलती। वह आदमी उसे उठाकर ध्यान से देखता है और उसके मन में सवाल पैदा होता है कि ऐसा मास्क इस सुनसान जंगल में आया कहाँ से। जिज्ञासा उसे आसपास की जमीन और चट्टानों को खोजने पर मजबूर करती है। थोड़ी दूर उसे पहाड़ के बीच एक संकरी सुरंग दिखती है।
वह अपने साथियों को बताए बिना अकेले अंदर चला जाता है। उसे लगता है कि शायद सुरंग के भीतर और भी दुर्लभ सामान या असली खजाना छिपा हो। बाहर से छोटी दिखाई देने वाली वह जगह भीतर से बहुत विशाल थी। कई कमरे, गलियारे और रास्ते बने थे, जैसे जमीन के नीचे पूरा सैन्य परिसर तैयार किया गया हो। वह आदमी अभी सब समझने की कोशिश ही कर रहा होता है कि अचानक उसके पैरों के नीचे की जमीन धँस जाती है। वह नीचे बने एक अंधेरे कमरे में गिरता है और उसकी चीखें सुरंग में गूँजती रहती हैं। फिर उसके साथ क्या होता है, यह तुरंत नहीं दिखाया जाता।
कई साल बाद द्वीप पर पहुँची नई टीम
कहानी आगे बढ़ती है और उसी द्वीप पर खोजकर्ताओं का नया दल आता है। इस अभियान का खर्च बेन नाम का बेहद अमीर युवक उठा रहा है। उसे पुरानी और दुर्लभ चीजें इकट्ठा करने का शौक है। वह केवल पर्यटन के लिए नहीं आया। उसका विश्वास है कि जापानी सेना ने युद्ध के दौरान इस द्वीप पर गुप्त बंकर बनाए थे और उनमें भारी मात्रा में सोना या अन्य बहुमूल्य वस्तुएँ छिपाई गई थीं।
बेन अपनी गर्लफ्रेंड कंग को भी साथ लाया है। उनके साथ जेसिका नाम की पुरातत्व विशेषज्ञ है, जो पुराने दस्तावेज, सैन्य निशान और युद्धकालीन संरचनाओं को समझने में मदद कर रही है। सुरक्षा के लिए बेन ने एक अनुभवी कप्तान और उसके हथियारबंद सैनिकों को पैसे देकर साथ रखा है। अधिकांश सैनिकों को अभियान की पूरी सच्चाई नहीं बताई गई। उन्हें बस इतना पता है कि उन्हें अपने ग्राहकों की सुरक्षा करनी है और द्वीप के भीतर एक खास जगह तक पहुँचना है।
जंगल में चलते समय कप्तान बार-बार सभी को सावधान रहने की चेतावनी देता है। द्वीप पूरी तरह अनजान है और खतरा किसी भी दिशा से आ सकता है। तभी एक सैनिक अचानक चिल्लाता है। सभी हथियार लेकर दौड़ते हैं और देखते हैं कि एक गुफा से इंसानी कंकाल बाहर निकाला गया है। पहले बेन और कंग डर जाते हैं, मगर अगले ही पल पता चलता है कि एक सैनिक ने मजाक किया था। वह कंकाल पकड़कर सबको डराने की कोशिश कर रहा था।
कप्तान को यह हरकत बिल्कुल पसंद नहीं आती। वह उसे डाँटता है कि किसी असली खतरे के बीच ऐसा मजाक पूरी टीम की जान ले सकता है। लेकिन इसी घटना के दौरान उन्हें पुराना बंकर मिल जाता है। बेन उत्साहित हो जाता है। जेसिका अंदर जाकर जाँच करने वाली होती है, मगर वह अंधेरी जगह में अकेले जाने से हिचकती है। बेन उसके साथ जाने का फैसला करता है और कप्तान बाकी सैनिकों के साथ बाहर पहरा देता है।
अंदर जंग लगा सामान, टूटे उपकरण और युद्धकाल की कई चीजें पड़ी हैं। कुछ देर बाद उन्हें दो सैनिकों के कंकाल मिलते हैं। बैज और बचे हुए निशानों से पता चलता है कि वे जापानी सैनिक थे। जेसिका संरचना को देखकर कहती है कि वे अपने लक्ष्य के काफी करीब हैं, लेकिन अभी पूरी बात नहीं बताती। वह चाहती है कि पहले आसपास का नक्शा और बंकरों की स्थिति ठीक से समझी जाए।
पुरानी खदान और अचानक हुआ हमला
टीम जंगल के और भीतर बढ़ती है। चारों तरफ इतने घने पेड़ हैं कि कुछ कदम दूर खड़ा आदमी भी मुश्किल से दिखाई दे। आखिर वे पुराने खनन क्षेत्र के पास पहुँचते हैं। जगह वर्षों से बंद है और लगभग पूरी तरह टूट चुकी है। मलबे के नीचे लोहे का एक बड़ा दरवाजा मिलता है। कप्तान उसे देखकर असहज हो जाता है। वह कहता है कि बिना यह जाने कि अंदर क्या है, आगे बढ़ना सही नहीं होगा।
लेकिन बेन की जिज्ञासा अब लालच में बदल चुकी है। उसे विश्वास है कि दरवाजे के पीछे वही चीज है जिसके लिए वह इतने पैसे खर्च करके यहाँ तक आया। वह कप्तान को दरवाजा खुलवाने का आदेश देता है। सैनिक काफी मेहनत के बाद जंग लगा भारी दरवाजा खोल देते हैं। टीम अभी अंदर जाने ही वाली होती है कि ऊपर चट्टानों के बीच छिपे गैंगस्टर उन पर गोलियाँ चलाने लगते हैं।
चारों तरफ अफरातफरी मच जाती है। कप्तान और उसके सैनिक जवाबी फायरिंग करते हुए बेन, कंग और जेसिका को बचाकर भीतर ले जाते हैं। लगभग सभी अंदर पहुँच जाते हैं, तभी हमलावर प्रवेश द्वार की तरफ ग्रेनेड फेंकते हैं। जोरदार धमाके से पूरा रास्ता हिल जाता है। खदान का प्रवेश द्वार बड़े-बड़े पत्थरों के नीचे दब जाता है। कप्तान का एक सैनिक मलबे में फँसकर मारा जाता है और जॉन नाम का दूसरा सैनिक गंभीर रूप से घायल हो जाता है।
अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। जिस जगह वे खजाना खोजने आए थे, वही उनकी कब्र बन सकती थी। बाहर जाने का रास्ता बंद है और किसी को समझ नहीं आता कि गैंगस्टरों को उनके मिशन और सही जगह की जानकारी कैसे मिली। कप्तान बेन से जवाब मांगता है। दबाव में बेन वह सच बताता है जिसे उसने सब से छिपाकर रखा था।
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