दशकों से जिंदा जापानी सैनिक
कप्तान और जेसिका को होश आता है तो उनके सामने मास्क पहना एक आदमी हथियार लेकर खड़ा है। वह खुद को दूसरे विश्व युद्ध का जापानी सैनिक बताता है। उसकी बातों से पता चलता है कि वह मानता है युद्ध अभी भी चल रहा है और जापान पूरी दुनिया पर जीत हासिल कर चुका है। दशकों से जमीन के नीचे बंद रहने के कारण उसे बाहरी दुनिया की कोई जानकारी नहीं।
जेसिका उसे समझाती है कि जापान युद्ध हार चुका था और बहुत पहले आत्मसमर्पण कर चुका है। वह सैनिक उसकी बात मानने को तैयार नहीं होता। तब जेसिका अपने टैबलेट में जापान के आत्मसमर्पण की पुरानी ऐतिहासिक फुटेज दिखाती है। वीडियो देखकर सैनिक स्तब्ध रह जाता है। उसका हथियार लगभग हाथ से छूट जाता है। वह मास्क हटाता है और उसका बुरी तरह बिगड़ा चेहरा दिखाई देता है। वर्षों की कैद और प्रयोगों ने उसे इंसान से कुछ और बना दिया था।
जेसिका पूछती है कि उसकी हालत ऐसी कैसे हुई और वह इतने वर्षों बाद भी जिंदा कैसे है। सैनिक बताता है कि वैज्ञानिकों ने उस पर और उसके साथियों पर अलग-अलग इंजेक्शन और प्रयोग किए थे। उन्हें बताया गया था कि इन दवाओं से वे कभी बूढ़े नहीं होंगे और हमेशा जवान व शक्तिशाली रहेंगे। असली लक्ष्य अमर सेना तैयार करना था।
ऐसे सैनिक जिन्हें दर्द महसूस न हो, सामान्य हथियार आसानी से न मार सकें और जो मौत के बाद भी दोबारा उठ खड़े हों। वैज्ञानिक उनकी इच्छा शक्ति खत्म करके उन्हें पूरी तरह नियंत्रित करना चाहते थे, ताकि वे जापान के लिए किसी भी देश पर कब्जा कर सकें। लेकिन प्रयोग का परिणाम इंसानियत से परे निकला। कई सैनिकों का शरीर गल गया, दिमाग अस्थिर हो गया और वे केवल हिंसा समझने वाले जीव बन गए। वैज्ञानिकों ने उन्हें परिसर में कैद कर दिया और बाहर निकलने के रास्ते बंद कर दिए।
कप्तान उससे बाहर जाने का रास्ता पूछता है। जापानी सैनिक बताता है कि मुख्य मार्ग बंद हो चुका है। दूसरा रास्ता मौजूद है, लेकिन उसी दिशा में सबसे खतरनाक प्रयोगों को बंद रखा गया था। उनके पास कोई सुरक्षित विकल्प नहीं था।
सोने से भी खतरनाक असली खजाना
उधर बेन और उसके बचे हुए साथी एक नए कक्ष में पहुँचते हैं। बीच में बेहद विकृत जीव बैठा है जिस पर बाकी सभी से ज्यादा प्रयोग किए गए थे। पास ही विशेष तरल पदार्थ से भरी शीशियाँ रखी हैं। दस्तावेजों और उस जीव की हालत को देखकर बेन को आखिर समझ आता है कि द्वीप का असली खजाना सोना नहीं था। असली खजाना वही रहस्यमय सीरम था जिससे इंसान को लगभग अमर योद्धा बनाया जा सकता था।
यह खोज सोने से कहीं ज्यादा कीमती और कहीं ज्यादा खतरनाक थी। अगर सीरम गलत हाथों में पहुँच जाए तो ऐसी सेना तैयार की जा सकती थी जिसे रोकना लगभग असंभव हो। कंग का कहना है कि उन्हें सीरम की शीशी अपने साथ ले जानी चाहिए। ब्लैक मार्केट में उसकी कीमत की कल्पना भी मुश्किल है। बेन भविष्य के खतरे के बारे में सोचे बिना एक शीशी अपने पास रख लेता है। यही लालच उनकी सबसे बड़ी भूल बनता है।
वे आगे बढ़ते हैं और एक बड़ा दरवाजा खोलते हैं। सामने लंबी गुफा में कतारों में अनगिनत सैनिक खड़े हैं। वे युद्ध के लिए तैयार किए गए अंतिम प्रयोग थे। सैकड़ों विकृत, लगभग अमर सैनिक हथियारों के साथ सेना की तरह खड़े हैं। लंबे समय से निष्क्रिय पड़े ये सैनिक घुसपैठियों की मौजूदगी से जागने लगते हैं।
अमर सेना का जागना
बेन और उसके साथी पीछे की तरफ भागते हैं। एक सैनिक को वे जीव तलवारों से घेरकर कुछ ही पलों में मार डालते हैं। बेन, कंग और बचा हुआ सैनिक दूसरे कक्ष की तरफ भागते हैं। रास्ते में उन्हें जॉन का शव और उन सैनिकों की लाशें दिखती हैं जिन्हें मास्क पहने जीवों ने पहले मार दिया था। अब पूरा भूमिगत परिसर अमर सैनिकों से भर चुका है। हर तरफ उनके कदमों और हथियारों की आवाज गूँजती है।
भागते समय एक जीव बेन पर हमला करके उसे बुरी तरह घायल कर देता है। कंग को लगता है कि वह मरने वाला है। घबराहट में वह वही सीरम निकालती है और बेन के शरीर में इंजेक्ट कर देती है। उसका विश्वास है कि दवा बेन की जान बचा लेगी। लेकिन वह भूल जाती है कि यही सीरम इंसानों को उन भयानक जीवों में बदलता है।
दूसरी तरफ अमर सैनिक कप्तान, जेसिका और पुराने जापानी सैनिक तक पहुँच जाते हैं। कप्तान जेसिका को लेकर भागता है, मगर जापानी सैनिक रुक जाता है। शायद अब उसे समझ आ गया है कि उसके लिए बाहर की दुनिया में कुछ नहीं बचा। वह अपने पुराने साथियों के सामने हथियार डाल देता है। वे उसे पहचानने या दया दिखाने की स्थिति में नहीं थे। वे उस पर टूट पड़ते हैं।
कंग बाकी सबको छोड़कर केवल बेन को बचाने की कोशिश करती है। वह उसे एक गुफा में छिपाती है। लेकिन सीरम असर दिखाना शुरू कर चुका है। बेन की नसें उभरती हैं, त्वचा गलने लगती है और आँखों से इंसानियत गायब होने लगती है। कुछ ही देर में वह खुद पर नियंत्रण खो देता है और उसी कंग पर हमला कर देता है जिसने उसे बचाने के लिए इंजेक्शन लगाया था। अंत में वह उसे मार देता है।
इससे साफ हो जाता है कि सीरम शरीर को मौत से बचा सकता है, लेकिन इंसान की चेतना और भावनाएँ नष्ट कर देता है। अमरता की कीमत इंसानियत थी।
अंतिम संघर्ष और जेसिका की आखिरी कोशिश
कप्तान और बचा हुआ सैनिक भी अमर सेना के हाथ लग जाते हैं। वे अंत तक लड़ते हैं, गोलियाँ चलाते हैं और रास्ता बनाने की कोशिश करते हैं। लेकिन जीवों की संख्या बहुत ज्यादा है। वे सामान्य जंगली प्राणी नहीं हैं। उनमें सैन्य प्रशिक्षण और रणनीति की कुछ स्मृतियाँ अब भी मौजूद हैं। वे मिलकर शिकार को घेरते हैं और भागने का हर रास्ता बंद कर देते हैं। आखिर कप्तान और अंतिम सैनिक भी मारे जाते हैं।
अब केवल जेसिका बची है। वह पुराने नक्शे और जापानी सैनिक द्वारा बताई जानकारी की मदद से पानी से भरे एक गुप्त रास्ते तक पहुँचती है। उसके पीछे अमर सैनिक फैले हुए हैं और आगे केवल अंधेरा पानी है। उसके पास जोखिम लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं। वह पूरी ताकत लगाकर पानी के भीतर तैरती है और लंबी सुरंग पार करने की कोशिश करती है।
काफी संघर्ष के बाद जेसिका आखिर द्वीप की खुली सतह पर पहुँच जाती है। कुछ क्षणों के लिए लगता है कि वह बच गई। उसने बाकी सभी को खो दिया, लेकिन शायद अब बाहर की दुनिया तक सच पहुँचा सकेगी। मगर कहानी का सबसे खतरनाक मोड़ अभी बाकी था।
जैसे ही जेसिका पानी से बाहर निकलती है, उसके पीछे उसी सुरंग से एक अमर सैनिक भी ऊपर आ जाता है। जेसिका संभल पाती उससे पहले वह उसे पकड़ लेता है और उसकी जान ले लेता है। अब ऐसा कोई जीवित व्यक्ति नहीं बचा जो बाहरी दुनिया को चेतावनी दे सके।
इसके बाद धीरे-धीरे पानी और भूमिगत रास्तों से अमर सैनिकों की पूरी सेना बाहर निकलने लगती है। दशकों से जमीन के नीचे कैद वे जीव अब खुले द्वीप पर पहुँच चुके थे। खोजकर्ताओं को जिस खजाने की तलाश थी, वह सोना नहीं बल्कि विनाशकारी तकनीक थी जो मृतप्राय इंसानों को अमर हत्यारों में बदल सकती थी।
बेन के लालच और पूरी टीम की जिज्ञासा ने उस सेना को आजाद कर दिया जिसे युद्ध के बाद हमेशा के लिए जमीन के नीचे बंद कर दिया गया था। अब वर्षो पहले खत्म हुआ युद्ध एक बार फिर शुरू हो सकता था, लेकिन इस बार दुश्मन ऐसे सैनिक थे जिन्हें दर्द महसूस नहीं होता, मौत का डर नहीं था और किसी इंसान पर दया नहीं आती थी। इसी रहस्यमय और भयावह अंत के साथ कहानी समाप्त होती है।
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