बेन के पिता की अधूरी खोज
बेन बताता है कि कई साल पहले उसके पिता भी इसी द्वीप पर आए थे। उन्हें विश्वास था कि जापानी सेना ने यहाँ बड़ी मात्रा में सोना और युद्धकालीन खजाना छिपाया था। लेकिन वे असली जगह तक नहीं पहुँच सके। उनकी अधूरी खोज को पूरा करने के लिए बेन जेसिका के साथ यहाँ आया है। उसका उद्देश्य केवल रोमांच नहीं बल्कि अपने पिता की तलाश को पूरा करना था।
कप्तान यह सुनकर भड़क उठता है। अगर उसे पहले से पता होता कि वे रहस्यमय खजाने के पीछे जा रहे हैं और दूसरे अपराधियों को भी इसकी भनक हो सकती है तो वह अभियान की तैयारी अलग ढंग से करता। अब उसका एक सैनिक मर चुका है और जॉन जिंदगी और मौत के बीच है। कप्तान साफ कह देता है कि वह बेन की दौलत के लिए अपने बाकी लोगों की जान खतरे में नहीं डालेगा। उसकी प्राथमिकता अब किसी तरह बाहर निकलना है।
मुख्य रास्ता मलबे से बंद है, इसलिए टीम मजबूरी में भूमिगत परिसर के भीतर दूसरा रास्ता खोजने लगती है। कुछ दूर उन्हें नीचे जाती सीढ़ियाँ मिलती हैं। ऊपर से जगह छोटी गुफा जैसी लगती है, लेकिन सीढ़ियों के नीचे विशाल बंकर फैला है। वे पुराने लकड़ी के पुल से गुजरते हैं। पहला व्यक्ति कदम रखता है तो आसपास की पुरानी लाइटें अचानक जल उठती हैं। सभी रुक जाते हैं। दशकों पुराने परिसर में बिजली अपने आप कैसे चालू हुई, यह बेहद डरावना सवाल था।
दीवारों पर दूसरे विश्व युद्ध के समय के जापानी झंडे लगे हैं। इतनी पुरानी व्यवस्था में सामान्य जनरेटर का अब तक काम करना मुश्किल था। इसका मतलब या तो यहाँ कोई अभी भी रहता था या कोई ऐसी प्रणाली मौजूद थी जो उनकी मौजूदगी पर सक्रिय हो रही थी। कप्तान हथियार तैयार रखकर सभी को धीरे-धीरे आगे बढ़ाता है।
खजाने की जगह मिली गुप्त प्रयोगशाला
दूसरी तरफ उन्हें एक पुराना स्टोर रूम मिलता है। वहाँ दवाइयाँ, इंजेक्शन, वैज्ञानिक उपकरण और वही विचित्र लोहे के मास्क रखे हैं जैसा शुरुआती गैंगस्टर को मिला था। जेसिका को कुछ तस्वीरें और दस्तावेज भी मिलते हैं। उनमें युद्धबंदियों पर किए गए क्रूर प्रयोगों का रिकॉर्ड था। जापानी वैज्ञानिक पकड़े गए सैनिकों को अलग-अलग दवाएँ और इंजेक्शन देकर उनके शरीर और दिमाग को बदलने की कोशिश कर रहे थे।
कप्तान अब भी सोने की कहानी पर विश्वास नहीं करता। उसे यह जगह किसी खजाने का गोदाम नहीं बल्कि गुप्त प्रयोगशाला लगती है। उसे शक है कि बेन के पिता को मिली जानकारी अधूरी रही होगी। तभी पहरे पर खड़ा सैनिक महसूस करता है कि उसके पीछे कोई मौजूद है। वह पलटकर देखता है तो अंधेरे में मास्क पहना एक आदमी खड़ा दिखाई देता है। उसका शरीर सामान्य नहीं और हरकतें इंसानों जैसी नहीं। सैनिक बंदूक तानता है, मगर रहस्यमय व्यक्ति अगले ही पल गायब हो जाता है।
अब तनाव तेजी से बढ़ता है। जेसिका बेन से कहती है कि सच छिपाना ठीक नहीं। वह सभी को बताती है कि यह स्थान मूल रूप से खदान नहीं बल्कि कभी अस्पताल था। युद्ध के दौरान जापानी सेना ने इस पर कब्जा करके इसे गुप्त प्रयोगशाला में बदल दिया था। यहाँ दुश्मन सैनिकों और कैदियों पर ऐसे प्रयोग किए जाते थे जिनका उद्देश्य इंसान को नियंत्रित और अधिक खतरनाक लड़ाकू में बदलना था।
वैज्ञानिक चाहते थे कि सैनिक दर्द महसूस न करें, डर नें, पीछे न हटें और बिना दया के हमला करें। शरीर इंसान का रहे, लेकिन उसकी इच्छा, संवेदना और स्वतंत्र सोच खत्म हो जाए। तस्वीरें और दस्तावेज जेसिका की बात सही साबित करते हैं। सोने का ठोस प्रमाण अभी भी नहीं है, मगर परिसर का असली रहस्य कहीं ज्यादा डरावना था।
लालच ने टीम को बाँट दिया
खजाने की बात सुनकर कुछ सैनिकों के मन में भी लालच आ जाता है। उन्हें लगता है कि अगर सच में सोना मिल गया तो उनकी जिंदगी बदल सकती है। कप्तान उनका रवैया देखकर नाराज होता है और याद दिलाता है कि एक साथी मर चुका है जबकि जॉन कभी भी दम तोड़ सकता है। वह आदेश देता है कि प्राथमिकता बाहर निकलने का रास्ता खोजना है।
लेकिन बेन खाली हाथ लौटना नहीं चाहता। उसने अभियान पर भारी पैसा लगाया था। टीम अलग-अलग हिस्सों में बँट जाती है। कप्तान और जेसिका घायल जॉन के पास रुकते हैं, जबकि बेन अपनी गर्लफ्रेंड और कुछ सैनिकों के साथ चुपचाप भीतर खजाना खोजने निकल जाता है।
कप्तान जेसिका से अपने अतीत की बात करता है। वह बताता है कि कभी वह बेहद स्वार्थी सैनिक था। उसने कई लड़ाइयाँ लड़ीं और बहुत लोगों की जान ली। तब उसके लिए केवल खुद जीवित रहना मायने रखता था। बाद में उसने वह जिंदगी छोड़ दी और तय किया कि बिना आवश्यकता किसी की जान नहीं लेगा। जेसिका उसकी बात सुनकर समझती है कि बाहर से कठोर दिखने वाला यह आदमी अपने भीतर कई पुराने बोझ लेकर चल रहा है।
उधर बेन और उसके साथी एक कमरे में पहुँचते हैं जिसके नीचे लोहे की जालियाँ और बंद कक्ष बने हैं। वहाँ अमेरिकी सेना का पुराना हेलमेट मिलता है। इससे साबित होता है कि जापानी सैनिकों ने अमेरिकी युद्धबंदियों को भी यहाँ कैद किया था। आगे उन्हें यातना और प्रयोगों में इस्तेमाल होने वाले उपकरण दिखाई देते हैं। फिर बड़े काँच के जारों में इंसानी शरीर के कटे अंग नजर आते हैं। अब साथ आए लोग भी डर जाते हैं, लेकिन बेन का लालच उस भय से बड़ा है।
जॉन की भयानक मौत
घायल जॉन को जमीन के नीचे कुछ हिलता महसूस होता है। पहले उसे लगता है कि यह भ्रम है। अचानक मिट्टी के भीतर से कोई चीज उसका पैर पकड़ लेती है। जॉन मदद के लिए चिल्लाता है और धीरे-धीरे नीचे खिंचने लगता है। कप्तान और जेसिका उसकी आवाज सुनकर दौड़ते हैं और मिट्टी हटाकर नीचे बने गड्ढे में उतरते हैं। लेकिन जब तक वे जॉन तक पहुँचते हैं, उसकी मौत हो चुकी होती है।
उसका शरीर असामान्य गति से गल रहा था, जैसे किसी जहरीले रसायन ने भीतर तक जला दिया हो। आसपास दर्जनों इंसानी कंकाल पड़े हैं। अब उन्हें समझ आता है कि परिसर में कोई चीज लोगों को नीचे खींचती, मारती और उनके शरीर वहीं छोड़ देती है। जेसिका और कप्तान अभी यह भयावह सच समझ ही रहे होते हैं कि पीछे से उन पर हमला होता है और दोनों बेहोश हो जाते हैं।
दूसरी ओर बेन के साथ गए सैनिकों पर अंधेरे गलियारों में विकृत शरीर वाले जीव टूट पड़ते हैं। उनके चेहरे गल चुके हैं और लोहे के मास्क लगे हैं। यह तय करना मुश्किल है कि वे इंसान हैं या किसी प्रयोग से बने जानवर। वे सैनिकों पर बेहद बेरहमी से हमला करते हैं। एक की आँखों पर वार होता है, दूसरा लगातार गोलियाँ चलाता है, मगर जीव गोली लगने के बाद भी आगे बढ़ते रहते हैं।
ध्यान से देखने पर उनके मास्क बिल्कुल वही हैं जो शुरुआत में गैंगस्टर को मिला था। यानी मास्क किसी खोए सैनिक का सामान नहीं, बल्कि इन प्रयोगों से बने जीवों की पहचान था। कुछ ही देर में कई सैनिक मारे जाते हैं।
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