एक दोस्त का अंत
नई रेलरोड परियोजना पर अरनी फिर मिल जाता है। दोनों एक-दूसरे को देखकर खुश होते हैं। इतने अस्थायी मजदूरों के बीच परिचित चेहरा मिलना अपने आदमी के मिलने जैसा है। काम के बाद वे साथ बैठते, बातें करते और पुरानी यादें साझा करते हैं।
कुछ हफ्तों बाद एक बड़ी टहनी अरनी के सिर पर गिरती है। रॉबर्ट तुरंत उसके पास पहुँचता है और उसे अकेला नहीं छोड़ता। शुरुआत में लगता है कि वह बच जाएगा, लेकिन सिर की चोट धीरे-धीरे उसके दिमाग और शरीर को प्रभावित करती है। वह बातें भूलने लगता है, फिर चलना मुश्किल हो जाता है और आखिर बिस्तर से उठना बंद कर देता है। कुछ ही दिनों में उसकी मौत हो जाती है।
रॉबर्ट के लिए यह नुकसान साधारण सहकर्मी की मृत्यु नहीं। अरनी वह व्यक्ति था जिससे वह हँसकर अपने मन की बातें कर सकता था। फिर भी काम रुकता नहीं। जंगल और रेलरोड किसी एक आदमी की मौत पर नहीं ठहरते। रॉबर्ट दर्द को भीतर रखकर सीजन पूरा करता है। काफी पैसा जमा हो चुका है और अब वह खुशी से घर लौटने की ट्रेन पकड़ता है। उसके मन में सिर्फ ग्लेडिस, केट और उनके भविष्य की योजना है।
पहाड़ पर उठता धुआँ
ट्रेन बोनट्स फेरी के करीब पहुँचती है तो यात्री खिड़कियों से दूर पहाड़ की तरफ देखने लगते हैं। जंगल में विशाल आग लगी है। रॉबर्ट का दिल बैठ जाता है, क्योंकि उसका घर उसी दिशा में है। स्टेशन पहुँचते ही वह चारों तरफ ग्लेडिस और केट को खोजता है। उसे उम्मीद है कि वे समय रहते कस्बे में आ गई होंगी। लेकिन दोनों कहीं नहीं मिलतीं।
वह पागलों की तरह जलते जंगल की ओर भागता है। रात और धुएँ के बीच मुश्किल रास्ते पार करके सुबह तक घर पहुँचता है। आग लगभग बुझ चुकी है, मगर उसका छोटा घर पूरी तरह राख बन चुका है। वहाँ कोई साफ शव नहीं मिलता। यही बात उसके भीतर उम्मीद भी पैदा करती है और डर भी। अगर शरीर नहीं मिले तो शायद ग्लेडिस और केट बचकर कहीं चली गई हों।
रॉबर्ट तुरंत जैक की दुकान जाता है। जैक उसे खाना देता है और भरोसा दिलाता है कि दोनों शायद किसी सुरक्षित जगह पहुँच गई होंगी। रॉबर्ट लौटकर जली हुई जमीन पर इंतजार करता है। रात हो जाती है, फिर भी परिवार नहीं आता। आग के सामने बैठा वह उसी चीनी मजदूर का भ्रम देखता है। दुख और अपराधबोध में वह उस छवि पर चिल्लाता है कि उसकी मौत के लिए वह जिम्मेदार नहीं था; उसने उसे नहीं मारा। फिर वह अपने मन में इससे भी भयानक आरोप बना लेता है—शायद उस आदमी की मौत का बदला लेने के लिए भाग्य ने ग्लेडिस और केट को उससे छीन लिया।
जैक अगले दिन फिर आता है और रॉबर्ट को अपने साथ जंगल छानने ले जाता है। दोनों बंदूक लेकर जंगली जानवरों से सावधान रहते हुए हर संभावित जगह खोजते हैं। रॉबर्ट को बार-बार पत्नी और बेटी की आवाजें सुनाई देती हैं। वह अपना सिर पकड़कर रोता है और कहता है कि ग्लेडिस ने उसे पहले ही बार-बार दूर न जाने को कहा था। अगर वह घर पर होता तो शायद उन्हें बचा सकता था।
दिनों की तलाश के बावजूद कुछ नहीं मिलता। रॉबर्ट अपने जले घर की जगह एक छोटा शेड बनाकर रहने लगता है। उसे यकीन है कि एक दिन वे लौटेंगी। उसी दौरान एक माँ कुतिया अपने दो पिल्लों के साथ शेड में शरण लेती है। शायद आग ने उनके झुंड को भी बिखेर दिया है। रॉबर्ट उन्हें भगाने के बजाय रहने देता है। उसके अकेलेपन में ये जानवर पहला जीवित साथ बन जाते हैं।
उम्मीद ने बीस साल तक उसे वहीं रोके रखा
रॉबर्ट फिर पेड़ काटने लगता है। काम करते समय उसे ग्लेडिस और केट की आवाजें सुनाई देती हैं, लेकिन जल्द समझ जाता है कि वे उसके मन के भ्रम हैं। वह रोज प्रार्थना करता है कि दोनों जहाँ भी हों सुरक्षित हों और लौट आएँ। महीनों के बाद भी उसकी उम्मीद नहीं टूटती। फिर साल बीतते हैं।
जंगल के मौसम उसके सामने एक के बाद एक गुजरते हैं। सर्दियों में बर्फ और ठंड के बीच वह लालटेन लेकर लकड़ी काटने निकलता है, वसंत में नदी फिर बहने लगती है और गर्मियों में पेड़ों की नई हरियाली जली हुई जमीन को ढक देती है। हर मौसम उसे समय के बीतने का अहसास देता है, फिर भी भीतर वह उसी दिन पर रुका है जब ट्रेन से लौटा और पहाड़ जलता देखा था।
देखते-देखते लगभग बीस वर्ष निकल जाते हैं। ग्लेडिस और केट कभी नहीं लौटतीं। रॉबर्ट अब बूढ़ा होने लगा है और भीतर का विश्वास लगभग समाप्त हो चुका है। दुनिया भी बदल गई है। वह फिर रेलरोड का काम देखने शहर जाता है और पाता है कि जहाँ कभी आदमी हाथों से विशाल पेड़ काटते थे वहाँ अब मशीनें काम कर रही हैं। नई तकनीक ने बहुत से पुराने मजदूरों की जरूरत कम कर दी है।
उसे वही पेड़ दिखाई देता है जिस पर दशकों पहले मरे तीन मजदूरों के बूट टाँगे गए थे। पेड़ बढ़ चुका है और बूट उसकी छाल में लगभग समा गए हैं। मजदूर उस पेड़ को काटने से बचते हैं। यह दृश्य रॉबर्ट को बताता है कि समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता। जिन लोगों के साथ उसने जीवन के दिन बिताए थे, उनके निशान भी अब जंगल का हिस्सा बन रहे हैं।
काम के बीच एक बुजुर्ग उसके पास आकर बैठता है। रॉबर्ट उसे बॉब के रूप में पहचानता है, जो पुराने दिनों में उसी दल के साथ काम करता था। बॉब भी उसे पहचान लेता है और दोनों थोड़ी देर पुराने दिनों को याद करके खुश होते हैं। वह अरनी के बारे में पूछता है। रॉबर्ट जानता है कि बॉब और अरनी की गहरी दोस्ती थी। वह उसका दिल नहीं तोड़ना चाहता, इसलिए साफ मौत बताने के बजाय कहता है कि कई साल से उसकी मुलाकात नहीं हुई और शायद उसने दूसरा काम पकड़ लिया होगा।
अकेलेपन में एक नया काम और नया परिचय
रॉबर्ट का जीवन धीरे-धीरे और शांत हो जाता है। उसके साथ बचा एक कुत्ता हर शाम शेड में उसका इंतजार करता है। कुछ और साल बाद वह मेहनत से बचाए पैसों से लगभग तीन सौ डॉलर की घोड़ागाड़ी खरीदता है। अब वह लोगों और सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाकर कमाई करने लगता है। शरीर पहले जैसी कठिन लकड़हारी नहीं झेल सकता, इसलिए यह नया काम उसके लिए बेहतर है और उसे आसपास की दुनिया से थोड़ा संपर्क भी देता है।
इसी दौरान क्लेयर नाम की वन अधिकारी जंगल की देखरेख के लिए आती है। वह लगभग रॉबर्ट की उम्र की है और पहली मुलाकात से ही खुलकर बातें करती है। रॉबर्ट की आदत वर्षों की तन्हाई में चुप रहने की हो चुकी है, इसलिए वह छोटे जवाब देता है। क्लेयर फिर भी उसके साथ सहज रहती है और मजाक करके बातचीत हल्की रखती है।
एक दिन रॉबर्ट उसे उसकी रहने की जगह, जंगल के ऊपर बने टावर तक छोड़ता है। क्लेयर किराया देते हुए कहती है कि कभी किसी चीज की जरूरत हो तो बताना। रॉबर्ट भी वही बात उसे कहता है। उसे बाद में पता चलता है कि क्लेयर ने भी भारी निजी नुकसान झेला है। उसके पति की हाल ही में मौत हुई थी। वह पहले नर्स थी, लेकिन दुख से बाहर निकलने और जिंदगी बदलने के लिए वन सेवा में आ गई। प्रकृति, टावर का एकांत और काम उसे शांति देते हैं।
क्लेयर के साथ रॉबर्ट की दोस्ती धीरे-धीरे बढ़ती है। वह उसके टावर जाता है। छोटी सी जगह उसने खूबसूरत घर जैसी सजाई है। रॉबर्ट आश्चर्य से कहता है कि जंगल के बीच यह छोटी जगह भी कितनी आरामदायक लग सकती है। वे कॉफी पीते हैं, आसपास के जंगल को ऊँचाई से देखते हैं और पहली बार रॉबर्ट अपने जीवन का दर्द खुलकर किसी से कहता है।
क्लेयर जंगल की पुरानी आग के बारे में पूछती है। यह सवाल रॉबर्ट को सीधे उसी रात में पहुँचा देता है। वह बताता है कि आग के समय वह घर पर नहीं था और उसे आज भी लगता है कि अगर मौजूद होता तो पत्नी और बेटी को बचा लेता। क्लेयर भी अपने पति की मौत का जिक्र करती है। वह कहती है कि वह खुद लंबे समय तक टूट गई थी, लेकिन फिर उसने नर्स का पुराना जीवन छोड़कर यह काम चुना। उससे दुख गायब नहीं हुआ, पर उसने सांस लेना दोबारा सीखा।
वह रॉबर्ट से कहती है कि जिंदगी में ऐसी घटनाएँ होती हैं जिन्हें वापस नहीं किया जा सकता। दुख को मिटाया नहीं जा सकता, लेकिन उसके पार जिया जा सकता है। ठहरे तालाब के पानी की तरह एक ही जगह जम जाने से जीवन खत्म नहीं होना चाहिए। रॉबर्ट उसकी बात सुनता है, मगर उसके लिए दशकों से बनी आदत बदलना आसान नहीं।
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