कहानी की शुरुआत सैन फ्रांसिस्को में होती है। रात का समय है और दो नाइजीरियन आदमी मास्क पहनकर, हाथों में हथियार लिए एक कार में बैठे किसी का इंतजार कर रहे हैं। कुछ देर बाद सामने एक दूसरी कार आकर रुकती है। उस कार में श्वेता नाम की महिला बैठी है। दोनों आदमी अचानक अपनी कार से उतरते हैं, श्वेता को बाहर खींचकर धक्का देते हैं और उसकी गाड़ी लेकर भाग जाते हैं। पहली नजर में यह सिर्फ कार चोरी लगती है। उन लोगों की श्वेता से कोई निजी दुश्मनी नहीं; वे स्मगलिंग और चोरी की गाड़ियों को अवैध बाजार में बेचने का काम करते हैं।
लेकिन घटना यहीं खत्म नहीं होती। कुछ समय बाद एक रहस्यमय आदमी दो दूसरे अपराधियों को इन्हीं नाइजीरियन लोगों की सुपारी देता है। वे दोनों उन्हें ढूँढकर मार देते हैं। बाद में मारे गए लोगों का एक भाई वहाँ पहुँचता है और लाश देखकर जोर-जोर से रोने लगता है। शुरुआत में इस हत्या का कारण स्पष्ट नहीं होता। अगर यह साधारण कार चोरी थी तो उन चोरों को इतनी जल्दी और इतनी योजनाबद्ध तरीके से क्यों हटाया गया? यही सवाल कहानी के भीतर छिपी बड़ी साजिश की पहली झलक बन जाता है।
चार साल से अकेला जी रहा ऋषि
कहानी दो महीने आगे बढ़ती है और अब हम ऋषि से मिलते हैं। वह सैन फ्रांसिस्को में निवेश बैंकर है, अच्छी नौकरी करता है, आर्थिक रूप से सुरक्षित है और बाहर से उसकी जिंदगी सफल दिखाई देती है। लेकिन निजी जीवन में वह चार साल से लगभग वहीं अटका हुआ है जहाँ उसका पुराना रिश्ता टूटा था। उसका दोस्त मजाक में पूछता है कि वह आखिर कब तक अकेला रहेगा। श्वेता से ब्रेकअप के बाद उसने किसी नई लड़की के साथ गंभीर रिश्ता शुरू ही नहीं किया।
दोस्त उसकी चिंता में उसके लिए एक डेट तय करता है। ऋषि उस लड़की से मिलता है, सामान्य बातचीत करता है, लेकिन साफ कह देता है कि वह आगे रिश्ता बढ़ाने के लिए तैयार नहीं। लौटकर घर आता है तो उसके फोन पर कुछ वॉइस संदेश पड़े हैं। आवाज सुनते ही वह चौंक जाता है—यह श्वेता है। चार साल से जिसके साथ कोई संपर्क नहीं था, वह अचानक घबराई हुई आवाज में उसे भारत आने को कह रही है। वह फोन पर पूरी बात नहीं बताती, बस इतना कहती है कि उसे ऋषि की मदद चाहिए और मामला बहुत जरूरी है।
ऋषि के मन में कई सवाल उठते हैं। क्या श्वेता की शादी में कोई समस्या है? क्या परिवार में कोई संकट आया है? इतने साल बाद उसने उसी को क्यों याद किया? संयोग से ऋषि को अपने परिवार के एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भारत जाना भी था। इसलिए वह तय करता है कि यात्रा करेगा, समारोह में जाएगा और साथ ही श्वेता से मिलकर सच जानेगा।
कॉलेज का प्यार और अधूरा रिश्ता
फ्लाइट में बैठते ही ऋषि को पुराने दिन याद आते हैं। कॉलेज में वह और श्वेता एक-दूसरे के करीब आए थे। शुरुआत दोस्ती से हुई, फिर दोनों का रिश्ता इतना स्पष्ट हो गया कि कॉलेज में लगभग सभी जानते थे। वे एक-दूसरे के साथ भविष्य की कल्पना करने लगे थे। ऋषि के लिए यह सामान्य प्रेम था, मगर श्वेता के परिवार के लिए नहीं।
श्वेता के पिता को सबसे बड़ी समस्या यह थी कि ऋषि उनके समुदाय और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का नहीं था। उनकी नजर में बेटी की शादी परिवार द्वारा चुने गए लड़के से ही होनी चाहिए थी। एक दिन वे जानबूझकर ऋषि से मिलने आए और सीधे कहा कि श्वेता को भूल जाओ। उन्होंने उसकी शादी कहीं और तय कर दी है और परिवार के सभी लोग इस फैसले के साथ हैं।
श्वेता ने हार नहीं मानी। कुछ समय बाद वह ऋषि के पास आई और कहा कि दोनों मंदिर जाकर शादी कर लेते हैं। शादी हो जाने के बाद पिता को मजबूरी में मानना पड़ेगा। ऋषि भी तैयार हो गया। दोनों मंदिर तक पहुँच गए, लेकिन शादी से ठीक पहले श्वेता के फोन पर उसके पिता का कॉल आया। आवाज सुनते ही वह घबराकर अस्पताल पहुँची। वहाँ पता चला कि उसके पिता को चौथे चरण का कैंसर है और वह काफी समय से यह बात बेटी से छिपा रहे थे।
श्वेता की दुनिया बदल गई। पिता की हालत देखकर उसने अपनी खुशी छोड़कर उनकी इच्छा पूरी करने का फैसला किया। उसने ऋषि से दूरी बना ली और परिवार की पसंद के लड़के से शादी करने के लिए तैयार हो गई। ऋषि के पास भी उसे मजबूर करने का कोई नैतिक आधार नहीं था। वह भारत छोड़कर अमेरिका चला गया। यही कारण था कि पिछले चार साल से दोनों ने एक-दूसरे को नहीं देखा था।
श्वेता ने ऋषि को क्यों बुलाया?
भारत पहुँचकर ऋषि होटल में कमरा लेता है और ट्रैवल एजेंसी से कार किराए पर लेने जाता है। वहाँ बाबू खान नाम का एजेंट उससे मिलता है। वह सहज और मददगार लगता है, कार की व्यवस्था कर देता है और जरूरत होने पर संपर्क करने को कहता है। ऋषि सीधे श्वेता से मिलने निकल जाता है।
चार साल बाद सामने आए दोनों कुछ पल एक-दूसरे को देखते रहते हैं। श्वेता पहले ऋषि की शादीशुदा जिंदगी के बारे में पूछती है। जब वह कहता है कि उसने अब तक शादी नहीं की, तो वह सच में हैरान होती है। ऋषि सवाल टालकर सीधे पूछता है कि उसे इतनी दूर से बुलाने की जरूरत क्यों पड़ी।
श्वेता बताती है कि उसका पति कार्तिक है और उनकी एक बेटी है—रिया। कुछ समय पहले रिया का नए स्कूल में दाखिला हुआ था। श्वेता उसे स्कूल ले जा रही थी। रास्ते में रिया को याद आया कि उसका टेडी पीछे की सीट पर रह गया है। वह उसे लेने पीछे झुकी। उसी समय दो नकाबपोश लोग आए, श्वेता को गाड़ी से धक्का दिया और कार लेकर भाग गए। रिया उसी कार में थी। उसके बाद से बेटी का कोई पता नहीं।
श्वेता दो महीने से पुलिस, स्कूल, परिचितों और हर संभावित जगह के चक्कर लगा रही है। ऋषि पूछता है कि कार्तिक क्या कर रहा है। वह बताती है कि कार्तिक काम में बेहद व्यस्त रहता है और मानता है कि पुलिस अपना काम करेगी। उसकी बेचैनी श्वेता जैसी नहीं। यही अकेलापन उसे ऋषि तक ले आया। उसे कॉलेज के दिनों का वह वादा याद था कि अगर कभी मुश्किल में हो तो ऋषि बुलाने पर आएगा।
पुलिस ने केस क्यों बंद कर दिया?
अगले दिन ऋषि श्वेता को लेकर पुलिस स्टेशन जाता है। वह उम्मीद करता है कि कम से कम जांच की कोई दिशा मिलेगी, लेकिन अधिकारी बताते हैं कि केस बंद किया जा चुका है। ऋषि भड़ककर पूछता है कि बच्ची मिले बिना मामला कैसे बंद हो सकता है। जवाब मिलता है कि महीनों तलाशने के बाद कोई सबूत, कोई गवाह, कोई रिकॉर्ड और कोई ठोस सुराग नहीं मिला। एक अधिकारी लगभग तंज में कहता है कि जब कोई चीज है ही नहीं तो उसे ढूँढेंगे कहाँ से?
यह वाक्य ऋषि को चुभता है। श्वेता रोते हुए बताती है कि पिछले दो महीनों से वही सुन रही है। ऋषि फाइल उठाकर देखने की कोशिश करता है, लेकिन इंस्पेक्टर तुरंत छीन लेता है और कहता है कि बाहरी आदमी को पुलिस फाइल नहीं दिखाई जा सकती। दोनों को स्टेशन से बाहर भेज दिया जाता है।
ऋषि के सामने पहली बार शक की दो दिशाएँ बनती हैं। या तो पुलिस बेहद लापरवाह है, या पुलिस किसी कारण से सच दबा रही है। वह श्वेता से रिया की तस्वीर लेता है और खुद जांच शुरू करने का फैसला करता है। फिर अमेरिका में अपने दोस्त को फोन करके बात बताता है। दोस्त सावधान करता है कि भारत में ऐसे मामले खतरनाक हो सकते हैं और परिवार की खातिर जल्दी वापस लौट आना बेहतर होगा।
कुछ समय के लिए ऋषि भी यही तय कर लेता है। वह किराए की कार लौटाने बाबू खान के पास जाता है। बाबू खान उसे एयरपोर्ट छोड़ने की पेशकश करता है। रास्ते में ऋषि उदास दिखाई देता है तो बाबू पूछता है क्या हुआ। ऋषि कहता है कि वह दो विकल्पों के बीच फँसा है—अमेरिका वापस जाए या रिया को खोजने के लिए रुके। बाबू खान सरल शब्दों में कहता है कि ऐसी स्थिति में आदमी को वह रास्ता चुनना चाहिए जिसे दिल सही मानता है।
यह बात ऋषि पर असर करती है। वह कुछ देर खिड़की से बाहर देखता है और अचानक कार मोड़ने को कहता है। अब वह बिना सच जाने वापस नहीं जाएगा।
Comments are shared across all parts of this story.