रिया के स्कूल में किसी ने उसे देखा ही नहीं
ऋषि श्वेता से उस स्कूल का पता लेता है जहाँ रिया का नया दाखिला हुआ था। वह प्रिंसिपल से मिलता है और किडनैपिंग के बारे में पूछता है। प्रिंसिपल तुरंत कहती है कि उनके स्कूल में रिया नाम की ऐसी कोई बच्ची दाखिल नहीं हुई और आसपास ऐसी कोई घटना भी कभी नहीं हुई। ऋषि को लगता है शायद स्कूल अपनी बदनामी से बचने के लिए सच छिपा रहा है।
स्कूल के सामने एक रिहायशी बिल्डिंग है। ऋषि वहाँ के वॉचमैन और कुछ परिवारों से पूछता है कि क्या उन्होंने उस दिन कार चोरी या बच्ची की किडनैपिंग देखी थी। जवाब फिर वही है—ऐसी कोई घटना उन्हें याद नहीं। इतने लोगों का एक जैसा जवाब संयोग नहीं लग रहा। इसी दौरान ऋषि बिल्डिंग के बाहर लगे दो सीसीटीवी कैमरे देखता है। कम से कम वीडियो रिकॉर्डिंग तो सच बता सकती है।
वह श्वेता के घर लौटकर ऐसी पारिवारिक तस्वीरें मांगता है जिनमें कार्तिक, श्वेता और रिया तीनों साथ हों। श्वेता कहती है कि कार्तिक हमेशा व्यस्त रहता था, वे परिवार के रूप में कहीं बाहर बहुत कम गए, इसलिए ऐसी फोटो नहीं हैं। ऋषि को यह जवाब असामान्य लगता है। एक बच्ची की माँ के घर में उसकी अकेली तस्वीरें तो हैं, लेकिन पिता-माँ के साथ लगभग कोई तस्वीर नहीं।
उसी समय नीचे एक गाड़ी रुकती है। श्वेता अचानक घबराकर ऋषि को छिपा देती है। कमरे में बॉबी आता है। वह कार्तिक का भाई है। कार्तिक अक्सर विदेश में रहता है, इसलिए उसने बॉबी को पीछे से श्वेता पर नजर रखने को कहा है। बॉबी नशे का आदी है, उसकी बातचीत में आक्रामकता है और वह श्वेता से अजीब सवाल करता है। ऋषि छिपकर उसे देखता रहता है और उसके जाने के बाद उसका नंबर व पता मांग लेता है।
बसंत खन्ना का पहचान-पत्र
अगले दिन ऋषि अपने पारिवारिक समारोह में जाता है। यहीं किसी रिश्तेदार के सवाल से पुराना फ्लैशबैक पूरा होता है और हमें समझ आता है कि श्वेता के पिता के कैंसर और तय शादी ने दोनों को अलग किया था। समारोह के बीच ऋषि को जमीन पर एक पुलिस अधिकारी का पहचान-पत्र मिलता है। नाम है बसंत खन्ना। वह कार्ड चुपचाप अपने पास रख लेता है।
अगले दिन वह स्कूल के सामने वाली बिल्डिंग में लौटता है और कार्ड दिखाकर वॉचमैन से कहता है कि वह पुलिस स्टेशन से आया है। अब वॉचमैन तुरंत सहयोग करता है। ऋषि सीसीटीवी रिकॉर्डिंग में वही तारीख खोजता है जिस दिन रिया गायब हुई थी। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि ठीक घटना के समय की फुटेज बीच से गायब है। पहले और बाद का रिकॉर्ड मौजूद है, मगर वही जरूरी हिस्सा नहीं।
ऋषि पूछता है कि ऐसा कैसे हो सकता है। वॉचमैन कहता है सारे पुराने रिकॉर्ड सर्विस रूम में होते हैं और संभव है वहाँ बैकअप हो। ऋषि उसे पैसे देने की पेशकश करता है और कहता है कि गायब फुटेज खोजकर उसे बताए। जाते-जाते उसके दिमाग में एक और विचार आता है। वह अपहरण से एक दिन पहले की सामान्य रिकॉर्डिंग देखता है। उसमें बॉबी उसी इलाके के आसपास घूमता दिखाई देता है। यह नया सुराग है।
बॉबी के पीछे जाते-जाते बाबू खान तक पहुँचा ऋषि
ऋषि बॉबी का पीछा करता है। कुछ समय बाद वह उसे एक नाइजीरियन आदमी के साथ देखता है। फिर दोनों अलग हो जाते हैं। ऋषि नाइजीरियन का पीछा करना चुनता है। आगे वह किसी दूसरे आदमी से पैसों और सामान का लेनदेन करता दिखाई देता है। ध्यान से देखने पर वह आदमी बाबू खान निकलता है। अब ऋषि को झटका लगता है, क्योंकि जिस ट्रैवल एजेंट को वह साधारण मददगार समझ रहा था, उसका संबंध अपराधियों से है।
ऋषि कुछ समझे उससे पहले एक नाइजीरियन उसे देख लेता है और बंदूक की नोक पर रोकता है। ऋषि लड़कर किसी तरह वहाँ से निकल जाता है। होटल लौटने पर बाबू खान मिलता है। सवाल करने पर बाबू बताता है कि वह स्मगलिंग नेटवर्क के कुछ लोगों को जानता है, चोरी की कार और सामान की डील होती है और पुलिस में भी कई लोगों को इसकी जानकारी है। वह जोर देकर कहता है कि रिया की किडनैपिंग से उसका कोई संबंध नहीं।
तभी वे नाइजीरियन लोग भी होटल पहुँच जाते हैं। माहौल तनावपूर्ण हो जाता है। बाबू खान बीच में पड़कर कहता है कि ऋषि उनका नहीं बल्कि बाबू का पीछा कर रहा था। इस तरह वह ऋषि की जान बचाता है। फिर भी ऋषि के मन से शक खत्म नहीं होता।
अखबार में छपी तस्वीर और दूसरा पिता
ऋषि अब खुला कदम उठाता है। वह रिया की तस्वीर के साथ गुमशुदगी का विज्ञापन अखबार में देता है। संपर्क नंबर अपना रखता है, लेकिन नाम बसंत खन्ना लिख देता है ताकि पुलिस अधिकारी का प्रभाव बने। श्वेता यह देखकर घबरा जाती है। उसे डर है कि किडनैपर बच्ची को नुकसान पहुँचा सकते हैं। ऋषि उसे समझाता है कि दो महीने की खामोशी से कुछ नहीं मिला; अब लोगों तक तस्वीर पहुँचना जरूरी है।
कुछ घंटों बाद एक आदमी फोन करता है और कहता है कि अखबार में छपी लड़की उसकी बेटी है। ऋषि उससे मिलता है। आदमी कई फोटो एल्बम, जन्म प्रमाणपत्र और अपनी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दिखाता है। दस्तावेजों में वही चेहरा है जिसे श्वेता रिया कहती है। ऋषि के सामने मानो दो अलग परिवार एक ही बच्ची पर दावा कर रहे हैं।
वह एल्बम ध्यान से देखता है और नोटिस करता है कि हर तस्वीर में बच्ची अकेली है। वह पूछता है कि पिता उसके साथ किसी फोटो में क्यों नहीं। आदमी जवाब देता है कि तस्वीरें उसी ने ली थीं, इसलिए वह कैमरे के पीछे था। कागजात इतने व्यवस्थित हैं कि ऋषि सीधे उन्हें नकली भी नहीं कह सकता।
इसी समय कार्तिक ऋषि को फोन करके मिलने बुलाता है। दूसरी तरफ अखबार में बसंत खन्ना का नाम देखकर दो गुंडे उसी नाम वाले पुलिस अधिकारी की तलाश शुरू कर देते हैं। ऋषि ने नंबर अपना दिया था मगर नाम किसी और का, और यही छोटी चाल बाद में असली बसंत की मौत का कारण बनती है।
कार्तिक का दावा—श्वेता की कोई बेटी ही नहीं
कार्तिक ऋषि से मिलता है और पूरी कहानी को उलट देने वाली बात कहता है। वह बताता है कि उसकी और श्वेता की कोई बेटी कभी थी ही नहीं। कुछ समय पहले एक हादसे में श्वेता के सिर पर गंभीर चोट लगी थी और वह कोमा में चली गई थी। ठीक होने के बाद उसने रिया नाम की बच्ची का जिक्र करना शुरू किया, जबकि घर में ऐसी कोई बच्ची नहीं थी। कार्तिक के अनुसार डॉक्टरों ने भी इसे मानसिक आघात से जुड़ा भ्रम माना।
ऋषि पहले कार्तिक पर भरोसा नहीं करता। तभी वॉचमैन फोन करके कहता है कि गायब सीसीटीवी फुटेज मिल गई। ऋषि तुरंत वहाँ पहुँचता है। रिकॉर्डिंग में घटना वाली कार दिखाई देती है। नकाबपोश आदमी श्वेता को बाहर धकेलते हैं और कार ले जाते हैं। लेकिन पीछे की सीट पर कोई बच्ची दिखाई नहीं देती। अब पहली बार उसे लगता है कि शायद श्वेता वास्तव में भ्रम में जी रही है।
वह श्वेता के पास जाकर गुस्से में कहता है कि तुमने मुझे एक ऐसी बच्ची को खोजने में लगा दिया जो है ही नहीं। श्वेता रोते हुए कहती है कि रिया पीछे की सीट में नीचे झुककर अपना टेडी उठा रही थी, इसलिए कैमरे में नहीं दिखी। ऋषि इसे भी भ्रम मानकर कहता है कि तुम्हें इलाज की जरूरत है। वह जाने लगता है, तभी उसकी नजर दीवार के नीचे बने बच्चों जैसे चित्रों और ऊँचाई नापने के निशानों पर पड़ती है। निशान इतने नीचे हैं कि कोई बच्चा ही वहाँ खड़ा होकर बनाता। ऋषि वापस सवाल करने के लिए मुड़ता है।
लेकिन उसी क्षण श्वेता ऊपर से छलांग लगा देती है। ऋषि कुछ नहीं कर पाता। वह नीचे पहुँचता है, मगर श्वेता की मौत हो चुकी होती है। उसे भयानक अपराधबोध होता है कि आखिरी बातचीत में उसने उसी की बात को झूठ और पागलपन कह दिया।
श्वेता की मौत में ऋषि ही संदिग्ध
इंस्पेक्टर रवि श्वेता की मौत की जांच शुरू करता है। फोन रिकॉर्ड में सबसे ज्यादा हाल की बातचीत ऋषि से हुई है। वह अमेरिका से अचानक आया, पुराने प्रेम का इतिहास है, आखिरी बार उससे झगड़ा हुआ और उसके बाद श्वेता ने छलांग लगा दी। पुलिस स्वाभाविक रूप से ऋषि को शक की नजर से देखती है।
ऋषि रिया की कहानी बताता है, लेकिन पुलिस के लिए यह और भी संदिग्ध है क्योंकि आधिकारिक रिकॉर्ड में ऐसी बच्ची का कोई ठोस अस्तित्व नहीं। पुलिस उसे दबाव में रखती है। इसी बीच बाबू खान ऋषि से मिलने आता है और कहता है कि उसने पहले झूठ बोला था। उसने रिया को सच में देखा था। बॉबी ने दो नाइजीरियन अपराधियों की मदद से बच्ची का अपहरण करवाया और बाबू को चुप रहने के लिए पैसे मिले थे।
बाबू यह भी स्वीकार करता है कि जिस दिन कार चोरी हुई, उसने पूरे घटनाक्रम को सामान्य स्मगलिंग समझकर चुप्पी साध ली थी। बाद में जब उसे समझ आया कि एक बच्ची भी इस खेल में है, तब तक अपराधियों ने उसे पैसे और डर दोनों से बाँध लिया था। अब श्वेता की मौत ने उसकी अंतरात्मा पर इतना दबाव डाला कि उसने ऋषि के सामने सच रखना जरूरी समझा।
यह बयान ऋषि के लिए निर्णायक है। श्वेता सच बोल रही थी। अब सवाल यह है कि पूरा शहर बच्ची के अस्तित्व से इनकार क्यों कर रहा है। दूसरी तरफ बसंत खन्ना नाम पढ़कर उसे खोज रहे दो गुंडे असली पुलिस अधिकारी तक पहुँच जाते हैं और उसे मार देते हैं। हत्या के बाद फोन पर उन्हें बताया जाता है कि उन्होंने गलत आदमी मार दिया। असली लक्ष्य कोई और था।
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